भागलपुर एसडीएम कार्यालय में रिश्वत लेते स्टेनो प्रेम कुमार गिरफ्तार, सृजन घोटाले से भी जुड़ा नाम, मयंक कुमार भी दबोचा गया
भागलपुर में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एसडीएम कार्यालय के स्टेनो प्रेम कुमार को 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे ...और पढ़ें

भागलपुर एसडीओ कार्यालय में वीजिलेंस छापेमारी, दो कर्मचारी हिरासत में, सख्त पूछताछ
HighLights
स्टेनो प्रेम कुमार 70 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार।
सहयोगी मयंक कुमार भी मौके से दबोचा गया।
प्रेम कुमार का सृजन घोटाले से पुराना नाता।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सदर अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय में तैनात स्टेनो प्रेम कुमार और उसके सहयोगी मयंक कुमार को 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को यह कार्रवाई निगरानी डीएसपी विध्यांचल प्रसाद के नेतृत्व में की गई।
दोनों आरोपितों को शिकायतकर्ता के जरिए ट्रैप कर पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम दोनों को अपने साथ पटना ले गई, जहां मंगलवार को विशेष निगरानी न्यायालय में पेश किया जाएगा।
सेवा संपुष्टि के नाम पर मांगी थी रिश्वत
जानकारी के अनुसार, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी अभिजीत कुमार से सेवा संपुष्टि (कन्फर्मेशन) के एवज में एक माह का वेतन और 70 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी। इससे परेशान होकर अभिजीत कुमार ने निगरानी विभाग के पटना कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद निगरानी टीम ने मामले का सत्यापन कराया, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।
केमिकल लगे नोट से रचा गया जाल
निगरानी टीम ने शिकायतकर्ता को केमिकल युक्त 70 हजार रुपये देकर आरोपितों के पास भेजा। जैसे ही प्रेम कुमार और मयंक कुमार ने रुपये लिए, पहले से घात लगाए टीम ने तुरंत दोनों को दबोच लिया। गिरफ्तारी के दौरान पूरी प्रक्रिया को नियमों के तहत पूरा किया गया और मौके पर ही साक्ष्य एकत्र किए गए।
सृजन घोटाले से जुड़ा रहा है नाम
प्रेम कुमार का नाम पहले भी करोड़ों रुपये के चर्चित सृजन घोटाले में सामने आ चुका है। उस समय वह जिलाधिकारी कार्यालय में स्टेनो पद पर तैनात था और कोतवाली थाने में दर्ज मामले में नामजद आरोपित बनाया गया था। मामले के बाद उसे निलंबित कर दिया गया था, लेकिन बाद में जमानत मिलने पर निलंबन समाप्त कर दिया गया।
निलंबन के बाद फिर मिली थी पोस्टिंग
निलंबन खत्म होने के बाद दिसंबर 2017 में प्रेम कुमार की तैनाती सदर अनुमंडल कार्यालय में कर दी गई थी। इसके लिए जिला प्रशासन ने सामान्य प्रशासन विभाग से अनुमति भी ली थी। हालांकि, इस दौरान सीबीआई की ओर से समय पर आरोप पत्र दाखिल नहीं किए जाने के कारण उसे राहत मिल गई थी।
बिचौलिए की भूमिका में था सहयोगी
निगरानी जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे मामले में प्रेम कुमार अकेला नहीं था। उसका सहयोगी मयंक कुमार बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था और रिश्वतखोरी की पूरी चेन में अहम कड़ी था। बताया जा रहा है कि मयंक, प्रेम कुमार का विश्वस्त सहयोगी था और लेन-देन की प्रक्रिया को संभालता था।
निगरानी ने दर्ज कराया सनहा
भागलपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए निगरानी टीम ने एसडीओ सदर कार्यालय में तैनात स्टेनो प्रेम कुमार और लिपिक मयंक राज को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद निगरानी डीएसपी विंध्याचल प्रसाद ने जोगसर थाने में सनहा दर्ज कराया है।
जोगसर थाने में दर्ज हुआ सनहा
सोमवार शाम डीएसपी जोगसर थाना पहुंचे और 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपितों के खिलाफ विधिवत कार्रवाई की जा रही है।
पूछताछ के लिए पटना ले जाया गया
निगरानी डीएसपी ने बताया कि सनहा दर्ज कराने के साथ ही दोनों आरोपितों को आगे की पूछताछ के लिए पटना ले जाया गया है।गिरफ्तार स्टेनो प्रेम कुमार झौआ कोठी स्थित क्वार्टर संख्या 26 का निवासी है, जबकि लिपिक मयंक राज सबौर रोड स्थित ज्योति विहार कॉलोनी में रहता है।
आगे की कार्रवाई जारी
निगरानी विभाग की इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। फिलहाल दोनों आरोपितों से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
