भागलपुर। विकास के नाम पर पेड़-पौधों की कटाई ने भागलपुर जैसे सदाबहार शहर को गर्म कर दिया है। इसके कारण यहा आए दिन आकाशीय बिजली गिरती रहती है। इससे जान-माल का व्यापक पैमाने पर नुकसान हो रहा है। पिछले दस दिनों में शाहकुंड, गोराडीह और पीरपैंती प्रखंड में 12 लोगों की मौत हो चुकी है। साल भर में यह आंकड़ा 60-70 तक पहुंच जाता है।

वस्तुत: हरियाली पर आघात करने की वजह से वज्रपात की घटनाएं बढ़ गई हैं। भागलपुर जिले में पिछले कुछ वर्षो में जिस तरीके से तापमान बढ़ा है, उससे आने वाले समय में आसमानी बिजली गिरने की तीव्रता कई गुना और बढ़नी तय है।

दोपहर में अधिक होता है वज्रपात

सामान्यत : बिजली गिरने की संभावना दोपहर में ज्यादा होती है, क्योंकि उस वक्त पृथ्वी और उसके पास का वातावरण अत्यधिक गर्म हो जाता है और गर्म हवा तेजी से ऊपर उठती है। जिले में हर वर्ष बिजली गिरने की संख्या और तीव्रता बढ़ती जा रही है और लोगों के मरने की संख्या भी। जिस तरीके से भागलपुर में हरियाली की कीमत पर कंक्रीट के जंगल बढ़े हैं, यह पहले की अपेक्षा अधिक गर्म हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने कहा है कि दिन के समय जब असामान्य रूप से अधिक तापमान रहता है या असामान्य रूप से अधिक गर्मी होती है तो गर्जन वाले तूफान की संभावना बढ़ जाती है। अप्रैल से जून के बीच यह प्रवृत्ति बढ़ जाती है। जलवायु बदलाव और ग्लोबल वार्मिग के दौर में वज्रपात की आपदाएं बढ़ जाएंगी। इन अध्ययनों में बताया गया है कि औसत तापमान में एक डिग्री सेल्सियस वृद्धि से बिजली गिरने में 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।

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सामान्य तड़ित चालक काफी नहीं : टीएमबीयू भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एसएन पांडेय ने बताया कि वज्रपात से बचने के लिए सामान्य तड़ित चालक ही काफी नहीं। स्कूलों में लगने वाले तड़ित चालक किसी काम के नहीं होते। इनके उपकरण अत्यंत घटिया होते हैं, जिसके कारण ये काम नहीं कर पाते। वह कहते हैं कि किसी भवन के पास कोई ऊंचे पेड़ या अन्य ऊंची वस्तु पर वज्रपात होता है तो भूमिगत प्रवाह के माध्यम से भी भवन में प्रवेश कर इंसान व बिजली के उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके प्रभाव से बचने के लिए तड़ित चालक लगाना चाहिए।

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क्यों होता है वज्रपात

जब आसमान में बिजली कड़कती है तो उससे ऊर्जा उत्पन्न होती है। जहा पहाड़ ज्यादा होते हैं और बादल अधिक बनते हैं, वहा बादल से बादल या पहाड़ से बादल टकरा जाते हैं। इससे ऊर्जा उत्पन्न होती है और वज्रपात हो जाता है। क्या हैं बचाव के उपाय

क्या करें, क्या न करें

- यदि आप घर के बाहर हों तो तुरंत किसी सुरक्षित जगह पर आश्रय लें।

- कभी किसी ऊंचे पेड़, चट्टान या पहाड़ के नीचे पनाह न लें। जमीन पर सीधे न लेट कर उकड़ू बैठें।

- नदी, तालाब या जलाशय के पास न रहें। धातु की वस्तु न छुएं।

- घर के अंदर हों तो तार वाले फोन का उपयोग न करें। किसी बिजली के उपकरण या उसके तार को न छुएं।

- खिड़की और दरवाजा बंद कर लें। टेलीविजन बंद कर दें। दीवार से दूर रहें, जमीन पर न बैठें। पलंग का इस्तेमाल करें।

- खुद को हमेशा सुरक्षित रखने की कोशिश करें।

- बिजली कड़कने के दौरान हमें खुले स्थान में नहीं रहना चाहिए। यदि खुले में रहें भी तो पानी के संपर्क में नहीं होना चाहिए।

- हरा पेड़ जब पानी से भीगा होता है तो आसमान से गिरने वाली बिजली उसके संपर्क में आ जाती है। इसलिए बारिश के दौरान पेड़ के नीचे नहीं रुकना चाहिए।

- यदि गाड़ी के अंदर हैं तो शीशे ठीक से बंद होने चाहिए। यदि शीशा जरा सा भी खुला है तो बिजली के संपर्क में आ जाएंगे।

- गीली जमीन पर नहीं खड़े होना चाहिए। सूखे स्थान पर बिजली का कोई प्रभाव नहीं होता। क्या करे सरकार

- अभियान चलाकर आम लोगों को जागरूक करे।

- सार्वजनिक स्थानों पर तड़ित चालक की संख्या बढ़ाए।

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कोट :-

पिछले कुछ दिनों से वज्रपात की बढ़ती घटनाओं से लग रहा है कि भागलपुर और इसके आसपास के क्षेत्र के वातावरण में ग्रीन हाउस गैस का जमाव हो रहा है। नए शोध के अनुसार पृथ्वी का तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़ने से 12 प्रतिशत अधिक बिजली गिरने की संभावना बढ़ जाती है।

- डॉ. एसएन पांडेय, पूर्व विभागाध्यक्ष, पीजी भूगोल

By Jagran