जागरण संवाददाता, कटिहार। यूपीएससी परीक्षा 2020 में देशभर में अपनी प्रतिभा का डंका बजाते हुए प्रथम स्थान पर रहे शुभम कुमार के कदवा प्रखंड के कुम्हरी स्थित पैतृक आवास पर रिजल्ट जारी होने के दूसरे दिन भी जश्न का माहौल बना रहा। शुंभम ने जागरण से बातचीत में कहा कि भातरीय प्रशासनिक सेवा को उन्होंने पहला विकल्प दिया था। आइएएस अधिकारी के रूप में अपने राज्य व देश की सेवा करना चाहता हूं।

उन्होंने कहा कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां आज भी विाकस की दरकार है। शिक्षा क्षेत्र खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। ताकि सिविल सेवा, मेडिकल, इंजीनियङ्क्षरग जैसी परीक्षा की तैयारी के लिए स्थानीय छात्रों को दूसरे राज्यों व बड़े शहरों में नहीं जाना पड़े। शुभम ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में आने के बाद सर्वस्पर्शी एवं सबल समाज का निर्माण तथा समाज के गरीब व वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोडऩा उनकी प्राथमिकता होगी।

शुभम ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता देवानंद सिंह, माता पूनम सिंह, बड़ी बहन एवं गुरूजनों को दिया है। सिविल सेवा की तैयारी करने के दौरान उनके माता, पिता एवं बड़ी बहन ने हमेशा प्रोत्साहित किया। साल 2019 की सिविल सेवा परीक्षा में 290 वां रैंक लाने के बाद बड़ी बहन ने आगे भी यूपीएससी की तैयारी जारी रखने एवं बेहतर रैंक लाने को लेकर प्रेरित किया। शुभम की बड़ी बहन भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर में विज्ञानी रह चुकी हैं। वर्तमान में इंदौर में है।

आइआइटी मुंबई से सिविल इंजीनियङ्क्षरग की पढ़ृाई पूरी करने वाले शुभम की शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में आने की इच्छा थी। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले शुभम के पिता देवानंद ङ्क्षसह उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक पूर्णिया में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। मां पूनम ङ्क्षसह गृहणी हैं। बचपन से ही शुभम मेधावी छात्र रहे। शुभम के पिता बताते हैं कि उनका संयुक्त परिवार है। उनके भाई का परिवार भी साथ ही रहता है। संयुक्त परिवार होने के कारण अपनी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की छाप भी शुभ्म पर बचपन से ही पड़ी। इसका असर शुभम के व्यक्तित्व एवं शैक्षणिक परिवेश पर भी हुआ। शुभम के घर शनिवार को दूसरे दिन भी बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।

 

Edited By: Abhishek Kumar