भागलपुर, जेएनएन। लॉकडाउन की वजह से जिले के करीब 24 सौ हस्तकरघा बुनकरों का कार्य ठप है। इस विषम परिस्थिति में केंद्र व राज्य सरकार ने उनके व्यापार को गति देने की पहल की है, ताकि वे मौजूदा चुनौतियों का सामना कर सकें। केंद्रीय वस्त्र मंत्री स्मृति इरानी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बुनकरों द्वारा तैयार कपड़ों की खरीदारी का आग्रह किया है। हस्तकरघा एवं रेशम निदेशक ने सभी विभागों, प्रमंडलीय आयुक्त व डीएम को बुनकर सोसायटी के पास उपलब्ध उत्पाद गमछा व वस्त्र आदि की आवश्यकता अनुरूप खरीदारी को कहा है। इससे बुनकरों को नकद राशि मिलेगी। कोरोना महामारी से बचाव के लिए मास्क व गमछा के उपयोग की सलाह दी गई है। इसकी बाजार में मांग भी है। इससे बुनकरों को रोजगार भी मिल जाएगा।

बिहार बुनकर कल्याण समिति के सदस्य अलीम अंसारी ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के 20 हजार से अधिक हस्तकरघा बुनकरों को फायदा मिलेगा। इस संबंध में जिला उद्योग महाप्रबंधक रामशरण राम ने बताया कि विभाग से निर्देश प्राप्त हुआ है। विभागों को जो भी आपूर्ति होगी, इसके लिए डीएम के स्तर से आर्डर मिलेगा। बुनकर सोसायटी संपर्क कर उत्पाद की बिक्री कर सकते हैं। अभी कहीं से आर्डर नहीं मिला है।

150 करोड़ का कपड़ा तैयार, खरीदार ही नहीं

लॉकडाउन की वजह से सिल्क सिटी भागलपुर में ढाई सौ करोड़ रुपये का कपड़ा उद्योग प्रभावित हो चुका है। बुनकरों के पास करीब 150 करोड़ का तैयार उत्पाद यूं ही पड़ा हुआ है। पावरलूम व हैंडलूम की खट-खट की आवाज अब नहीं सुनाई पड़ती है। जिले के 25 हजार पावरलूम, हैंडलूम व रंगाई केंद्र तक बंद है। इससे जुड़े 80 हजार बुनकर व मजदूर बेहाल हैं।

कपड़ा व्यवसायी हाशिम ने कहा सड़क पर आवागमन बंद है। बाजार में खरीदार नहीं हैं। इससे भारी नुकसान हुआ है। हाशिम ने बताया कि लॉकडाउन में करीब 250 करोड़ रुपये के कपड़ा उद्योग को नुकसान हुआ है। आर्डर मिलने के बाद पांच हजार दुपट्टा तैयार किया। अब महाजन राशि नहीं देना चाहते हैं। पूरी पूंजी फंस गई। बुनकर मजदूरों को पारिश्रमिक भी नहीं मिल रहा। हुनर वाले हाथों को दाने-दाने की जुगाड़ में भटकना पड़ता है। सामाजिक संगठनों से जो राशन मिलता है उससे पेट भर लेते हैं। चंपानगर व नाथनगर समेत जिले के अधिसंख्य बुनकरों की माली हालत खराब हो चुकी है। बुनकर मु. सरफराज के पास 20 से अधिक पावरलूम है। इससे 50 मजदूर जुड़े थे। रोजगार पूरी तरह से ठप है। महाजन बकाया देना नहीं चाहते। सरफराज ने कहा कि सरकार को इनकी सहायता की पहल करनी चाहिए।

Posted By: Dilip Shukla

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