जागरण संवाददाता, पूर्णिया। अमित शाह का पूर्णिया दौरा खोदा पहाड़, निकली चुहिया वाली कहावत चरितार्थ कर गया। देश के गृहमंत्री से सीमांचल की जनता को बहुत सारी उम्मीदें थी लेकिन साहेब ने बुरी तरह निराश किया। जिस तरह की भाषा का वे प्रयोग कर रहे थे, एक मंत्री को शोभा नहीं देता। उक्त बातें सांसद संतोष कुमार कुशवाहा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जनभावना रैली में दिए गए भाषण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही है।

सांसद ने कहा कि गृहमंत्री जी को पता होना चाहिए कि सीमांचल के इलाके में गंगा-जमुनी तहजीब की धारा दशकों से बहती रही है। यहां मुस्लिम भी छठ पूजा करते हैं और हिन्दू रोजा रखते हैं। उन्हें पता होना चाहिए कि यहां जनता की सरकार है इसलिए किसी को डरने का सवाल ही नहीं है। नीतीश कुमार घृणा फैलाने के लिए नही सुशासन के लिए जाने जाते हैं। लोगो को उम्मीद थी कि केंद्रीय मंत्री महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की हित की बात करेंगे लेकिन उन्होंने पूरी तरह निराश किया। संतोष कुशवाहा ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री के स्थानीय सलाहकारों को पूर्णिया एयरपोर्ट के बाबत उन्हें पूरी जानकारी देनी चाहिए थी। वे कहते हैं कि एयरपोर्ट बन गया, कब बन गया सीमांचल की जनता जानना चाहती है।

राज्य सरकार जमीन अधिग्रहण कर केंद्र को सौंप चुकी है लेकिन मामले को लटका कर रखा गया है, जो सीमांचल की जनता के साथ धोखा है। सांसद ने कहा कि नीतीश जी जनता की कृपा से मुख्यमंत्री बने हुए हैं, भाजपा की कृपा से नही। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 और 2025 में भापजा का ख्वाब अधूरा रह जाएगा। सांसद ने कहा कि सीमांचल में भाजपाइयों के हो रहे पेट दर्द का इलाज लालू जी और नीतीश जी के नेतृत्व में बेहतर तरीके से आने वाले दिनों में किया जाएगा।

सांसद ने कहा कि सभा मे आए हुए किसानों,युवाओं और महिलाओं को गृह मंत्री को बताना चाहिए कि 900 का डीएपी 1350 और 500 रुपये का पोटाश 1900 रु में क्यों मिल रहा है। सीमांचल से रोजगार के लिए पलायन बड़ी समस्या है, उसे कम करने के बारे में भी उन्हें बोलना चाहिए था। लेकिन लगता है महंगाई उनके लिए कोई मुद्दा नही है। महिलाएं घर की रसोई कैसे चला रही है यह उन्हें नहीं पता है। कहा कि गृह मंत्री जिस 1.50 लाख करोड़ की बात कर रहे हैं वह ख़ैरात नही बिहार का हक़ है। सांसद ने कहा कि बेहतर होता कि वे जुमलेबाजी की जगह सीमांचल और बिहार की बेहतरी की बात करते तो उनकी यह सभा सार्थक साबित होती।

Edited By: Dilip Kumar shukla

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