भागलपुर, जेएनएन। शहीद जुब्बा सहनी केन्द्रीय कारा और विशेष केंद्रीय कारा के दो सज़ावार कैदियों की मौत मायागंज अस्पताल में हो गई। मरने वाले कैदियों में खगड़िया निवासी शिव साह और मुंगेर निवासी प्रशांत कुमार सिंह शामिल हैं। कैदी शिव साह को ज्वर और सांस में तकलीफ की शिकायत पर शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा से शनिवार की सुबह 8 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसे 2017 में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। सजा के बाद से भागलपुर स्थानांतरित किया गया था। कैदी प्रशांत कुमार सिंह को विशेष केन्द्रीय कारा प्रशासन ने 31 जुलाई को ही मायागंज अस्पताल में टीवी समेत अन्य बीमारी के चलते तबीयत बिगड़ने पर भर्ती कराया था। शनिवार की देर रात उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। दोनो कैदियों के मरने की सूचना जेल अधिकारियों ने उनके परिजनों को दे दी है। मृत कैदियों के कोरोना जांच की भी कवायद की जा रही है।

खाकी के लिए मुसीबत बनी जेल की नई गाइडलाइन

कोरोना काल में जेल की नई गाइडलाइन खाकी वर्दी वालों के लिए मुसीबत बनने लगी है। पुलिस वालों को अब आरोपितों को जेल भेजने के पूर्व उनकी कोरोना जांच करानी पड़ रही है। इसके लिए उन्हें अस्पताल के जांच केंद्र पर भटकना पड़ रहा है। यानी जेल भेजने से पहले आरोपित की कोरोना जांच कराना जरूरी हो गया है। यही नहीं जेल में प्रवेश के पूर्व कोरोना जांच रिपोर्ट देखने के बाद ही आरोपित की एंट्री की जाती है। जेल में बंद कैदियों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए कारा मुख्यालय ऐसी एहतियात बरत रहा है। भागलपुर की तीनों जेलों शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा, विशेष केंद्रीय कारा और महिला मंडल कारा में कैदियों की संख्या लगभग चार हजार है। जिन्हें संक्रमण से बचाना बड़ी चुनौती से कम नहीं। जेल में संक्रमण का दायरा बढ़ा तो कोरोना कहर बनकर टूटेगा। इसलिए कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए कारा मुख्यालय ने नई गाइडलाइन जारी कर रखी है। अब पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी बाद कोरोना जांच कराने के बाद कोर्ट में उपस्थित कराती है। कोर्ट से आरोपित को अस्थायी जेल में 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन करने भेजा जाता है। भागलपुर में पुरुष आरोपित के लिए मुंगेर और महिला आरोपितों के लिए पटना सिटी में अस्थायी विशेष जेल बनाया गया है। दोनों जगहों पर 14 दिनों के क्वारंटाइन अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें जेल लाया जाता है। नई गाइडलाइन में आरोपित के पकड़े जाने पर उसकी कोरोना जांच, उन्हें जेल ले जाने वाले पुलिसकर्मी भी कोरोना जांच जरूरी है। ऐसी स्थिति में कोरोना जांच के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर उन्हें चक्कर लगाना पड़ता है। पहले से जांच कराने वालों की भी वहां भीड़ हुआ करती है।

एक दर्जन जेलकर्मी हो चुके संक्रमित, चार कैदियों की मौत

यहां की जेलों में तैनात एक दर्जन कक्षपाल समेत जेल कर्मी कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं। उनका उपचार आइसोलेशन वार्ड में कराया जा रहा है। अबतक चार कैदियों की कोरोना से मौत हो चुकी है। दो कैदियों में संक्रमण पाया गया था, उपचार बाद दोनों निगेटिव हो चुके हैं।

Posted By: Dilip Shukla

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