जागरण संवाददाता, भागलपुर। शोध के लिए शोधार्थियों को विषय चयन में गंभीरता बरतनी चाहिए। भागलपुर एवं आसपास के कई ऐसे अनछुए पहलू हैं, जिन पर अब तक शोध नहीं हुए हैं। गंगा किनारे रहने वाले विभिनन सामुदाय विशेष के इतिहास, उनकी स्थिति, पलायन जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं। यह बातें तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के पीजी इतिहास विभाग में डा. राजीव कुमार सिन्हा ने शनिवार को रिसर्च मैथडोलाजी कक्षा के उद्घाटन पर कही। वे इतिहास के पूर्व हेड, सीसीडीसी और कुलसचिव भी रह चुके हैं।

उन्होंने आधुनिक भारत के विद्यार्थियों के लिए 18वीं व 19वीं सदी के भागलपुर के इतिहास पर शोध की महत्ता पर बल दिया। डा. सिन्हा ने शोध के विभिन्न आयामों पर अपने विचार दिया। अपनी-अपनी दिलचस्पी के हिसाब से शोध के विषय चयन करने पर बल दिया। साथ ही क्षेत्रीय स्तर से लेकर अखिल भारतीय स्तर पर शोध के विषयों के चयन पर अपनी बात रखी।

कार्यक्रम की शुरूआत पीजी इतिहास के हेड डा. अशोक कुमार सिन्हा ने अतिथियों का स्वागत कर किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राचीन भारत के विद्यार्थियों को विक्रमशिला के साथ तिब्बत, पाली भाषा का भी ज्ञान होना चाहिए। इसी तरह मिडाइवल के विद्यार्थी परसियन भाषा पर भी अपनी पकड़ बना सकते हैं। वे टीएमबीयू के पीजी परसियन विभाग के शिक्षक से मदद ले सकते हैं। आधुनिक भारत के विद्यार्थियों को विभिन्न लाइब्रेरी और उनके आकाईव समेत अन्य संसाधनों की मदद लेनी चाहिए।। शोध की गुणवत्ता बनाने के लिए कड़ी मेहनत भी जरूरी है।

कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने अपना सवाल जवाब भी अतिथियों से किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. राधिका मिश्रा ने करते हुए संबोधन दिया। कार्यक्रम को विभाग के डा. केके मंडल, डा. राजशेखर, टीएनबी कालेज के शिक्षक डा. रविशंकर चौधरी ने भी संबोधित किया। इस मौके पर डा. आनंद कुमार झा समेत रिसर्च मैथडोलाजी के लिए काफी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे। हेड ने बताया कि पीजी इतिहास में रिसर्च मैथडोलाजी कोर्स में नामांकन की प्रक्रिया बंद कर दी गई है। इसके साथ शनिवार को कक्षा शुरू कर दी गई है। 

Edited By: Abhishek Kumar