भागलपुर : तिलकामांझी समाधि स्थल पर लगा 10 फीट ऊंचा लाल शिलापट्ट; राजस्थान के पत्थर पर उकेरी गई अमर सेनानी की शौर्यगाथा
Bhagalpur Tilka Manjhi Samadhi Sthal: भागलपुर में तिलकामांझी समाधि स्थल पर 10 फीट ऊंचा लाल शिलापट्ट स्थापित किया गया है। ...और पढ़ें

अंग्रेज कलेक्टर को तीर से ढेर करने वाले वीर को नमन! तिलकामांझी समाधि स्थल पर 10 फीट के पत्थर पर अंकित हुई जीवनी
HighLights
भागलपुर में तिलकामांझी समाधि स्थल पर भव्य शिलापट्ट स्थापित।
शिलापट्ट पर अमर सेनानी तिलकामांझी की शौर्यगाथा उकेरी गई।
1784 में अंग्रेज कलेक्टर क्लीवलैंड को तीर से मार गिराया।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Tilka Manjhi Samadhi Sthal: देश के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी और अदम्य साहस के प्रतीक अमर शहीद तिलकामांझी के त्याग और बलिदान की गाथा अब पत्थरों पर जीवंत हो उठी है। भागलपुर नगर निगम द्वारा तिलकामांझी समाधि स्थल परिसर में विकसित किए जा रहे पार्क में 10 फीट ऊंचा एक भव्य शिलापट्ट स्थापित किया गया है।
राजस्थान से विशेष रूप से मंगाए गए उच्च गुणवत्ता वाले लाल सैंड स्टोन (बलुआ पत्थर) पर तराशे गए इस शिलापट्ट पर बाबा तिलकामांझी के जन्म, अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध उनके ऐतिहासिक संघर्ष और शहादत का संपूर्ण विवरण सुनहरे अक्षरों में अंकित किया गया है।
तिलकपुर में जन्म और अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध उलगुलान
शिलापट्ट पर दर्ज ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, तिलकामांझी मुर्मू का जन्म 11 फरवरी 1750 को भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड अंतर्गत तिलकपुर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम सुंदरा मुर्मू और माता का नाम पानो था। जंगलों और अपनी माटी पर ईस्ट इंडिया कंपनी के शोषण व अत्याचार के खिलाफ उन्होंने आदिवासियों और वंचितों को संगठित किया। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनका यह सशस्त्र जनसंघर्ष वर्ष 1781 से 1785 तक लगातार चला, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिलाकर रख दी थी।
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शिलापट्ट पर अंकित इतिहास: एक नजर में
स्थान: तिलकामांझी समाधि स्थल परिसर (नवनिर्मित पार्क), भागलपुर।
शिलापट्ट की ऊंचाई व बनावट: 10 फीट ऊंचा, राजस्थान का लाल सैंड स्टोन।
अमर सेनानी का पूरा नाम: तिलकामांझी मुर्मू।
जन्म: 11 फरवरी 1750 (ग्राम- तिलकपुर, प्रखंड- सुल्तानगंज, भागलपुर)।
माता-पिता: पिता- सुंदरा मुर्मू, माता- पानो।
ऐतिहासिक संघर्ष: वर्ष 1781 से 1785 तक ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध उलगुलान।
बड़ा प्रहार: 13 जनवरी 1784 को भागलपुर के अंग्रेज कलेक्टर आगस्टस क्लीवलैंड को तीर से मार गिराया।
शहादत: घोड़ों से घसीटे जाने के बाद 13 जनवरी 1785 को बरगद के पेड़ पर फांसी।
जब तीर से ढेर किया था अंग्रेज कलेक्टर क्लीवलैंड
शिलापट्ट पर उनके अदम्य पराक्रम का उल्लेख करते हुए दर्ज है कि 13 जनवरी 1784 को तिलकामांझी ने भागलपुर के तत्कालीन अत्याचारी अंग्रेज कलेक्टर आगस्टस क्लीवलैंड को पेड़ पर छिपकर अपने अचूक तीर से मार गिराया था। इस दुस्साहसिक घटना के बाद पूरी अंग्रेजी सेना में हड़कंप मच गया था।
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इसके बाद अंग्रेजों ने भारी सैन्य बल के साथ घेराबंदी कर उन्हें धोखे से बंदी बना लिया। ब्रिटिश हुकूमत ने उनके आत्मसम्मान को तोड़ने के लिए उन्हें चार घोड़ों से बांधकर भागलपुर की सड़कों पर घसीटा, लेकिन अमर सेनानी ने घुटने नहीं टेके। अंततः 13 जनवरी 1785 को भागलपुर में एक विशाल बरगद के पेड़ से लटकाकर उन्हें फांसी दे दी गई।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगा समाधि स्थल
शिलापट्ट पर बाबा तिलकामांझी को देश के 'प्रथम स्वतंत्रता सेनानी' के रूप में नमन करते हुए उनके सर्वोच्च बलिदान को रेखांकित किया गया है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि समाधि स्थल परिसर को एक खूबसूरत और प्रेरणादायी स्थल के रूप में संवारा जा रहा है। यहां स्थापित 10 फीट ऊंचा यह लाल शिलापट्ट आने वाले सैलानियों, शोधार्थियों और युवा पीढ़ी को अमर शहीद के संघर्ष और देशप्रेम से रूबरू कराएगा।
