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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

स्‍कूलों से अचानक गायब हो गये तीन लाख छात्र, सामने आयी वजह

By Ravi RanjanEdited By:
Published: Thu, 05 Oct 2017 04:58 PM (IST)Updated: Thu, 05 Oct 2017 11:26 PM (IST)

बिहार में एक के बाद एक घोटाले का पर्दाफाश हो रहा है। अब नामांकन घोटाला सामने आया है। बच्चों के ...और पढ़ें

स्‍कूलों से अचानक गायब हो गये तीन लाख छात्र, सामने आयी वजह
स्‍कूलों से अचानक गायब हो गये तीन लाख छात्र, सामने आयी वजह

सहरसा [अमरेंद्र कांत]। बिहार में एक के बाद एक घोटाला की परतें खुल रही है। अब कोसी के स्कूलों में नामांकन घोटाले की पोल खुलने लगी है। आधार सीडिंग के बाद नामांकित छात्रों की संख्या तीन लाख तक कम हो गई है। फर्जी नामांकन की बात सामने आने के बाद माना जा रहा है कि इन बच्चों के मध्याह्न भोजन, पोशाक समेत अन्य योजनाओं के नाम पर सरकारी राशि का गोलमाल किया गया है।

46 फीसद बच्चे स्कूल नहीं आते

विभाग के ही आंकड़ों की बात करें तो करीब 46 फीसद बच्चे स्कूल नहीं आते हैं। सहरसा में स्कूल नहीं आने वाले बच्चों की संख्या 48 फीसद है। मधेपुरा में 41 एवं सुपौल में 49 फीसद हैं। सूत्र बताते हैं निजी विद्यालयों के छात्रों, शहर या गांव से बाहर रहने वाले छात्रों के अलावा आंगनबाडिय़ों पर जाने वाले छात्रों को भी सरकारी स्कूलों में नामांकित करा दिया जाता है।

आधार सीडिंग से खुल रही है पोल

सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के लाभ के लिए आधार कार्ड व बैंक खाता अनिवार्य किए जाने के बाद फर्जी नामांकन की पोल खुलने लगी है। प्रमंडल में वर्ग एक से आठ तक के लिए 4,445 स्कूलों का संचालन हो रहा है। इनमें करीब 11 लाख विद्यार्थी पूर्व से नामांकित थे। आधार सीडिंग के बाद नामांकित बच्चों की संख्या तीन लाख तक कम हो गई। इनमें सहरसा में 87 हजार, मधेपुरा में एक लाख 25 हजार एवं सुपौल में डेढ़ लाख बच्चे हैं। अभी आधार सीडिंग का काम चल रहा है। इस कारण फर्जी नामांकन की संख्या बढऩे की उम्मीद है।

हर वर्ष खर्च होते हैं 50 करोड़

सिर्फ मध्याह्न भोजन योजना की बात करें तो हर वर्ष करीब इसमें 50 करोड़ की राशि खर्च होती है। डेढ़ लाख क्विंटल से अधिक चावल का आवंटन होता है। इससे इतर पोशाक व अन्य योजनाओं पर भी 50 करोड़ से अधिक राशि खर्च की जाती है। आधार सीडिंग के बाद सरकारी राशि के गोलमाल पर विराम लग जाएगा। क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक प्रभाशंकर सिंह का कहना है कि फर्जी तरीके से नामांकित छात्रों के नाम काटे जा रहे हैं। आधार सीडिंग के बाद एक भी फर्जी छात्र नहीं रहेगा।