जागरण संवाददाता, भागलपुर : 'एक महीने में दो हजार किसान सलाहकार की बहाली होगी। नियुक्ति संबंधित आदेश जारी कर दिया गया है। नालंदा में बहाली की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सूबे में किसान सलाहकार के दो हजार पद खाली हैं।' उक्त बातें सूबे के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित रिसर्च काउंसिल की बैठक में कही। उन्होंने कहा कि किसान सलाहकार को कम राशि मिल रही है, जिसे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दस लाख लोगों को नौकरी देने के लक्ष्य में परेशानी हो रही है। बिहार सरकारी की एजेंसी के पास बहाली की क्षमता कम रहने की वजह से परेशानी हो रही है। एजेंसी की क्षमता बढ़ाने का प्रयास चल रहा है। दस लाख बहाली की ओर सरकार अग्रसर है।

  • एक महीने में होगी दो हजार किसान सलाहकार की बहाली : मंत्री
  • -नियुक्ति से संबंधित आदेश जारी, नालंदा में शुरू हुई बहाली
  • -एजेंसी की क्षमता कम रहने के कारण बहाली में आ रही अड़चन

मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय और कालेज में काफी फर्क है। कालेज में सिर्फ डिग्री मिलती है, जबकि विश्वविद्यालय में शोध कार्य होते हैं। विश्वविद्यालय का ढांचा चरमरा गया है। शिक्षक की जगह गेस्ट फेकेल्टी पढ़ा रहे हैं। विश्वविद्यालय को चलाने की नीति बदलनी होगी। पैसे लगाने होंगे। खाली पदों को भरना होगा। इसके लिए प्रयास किए जाएंगे। विश्वविद्यालय से जुड़ी फाइल पर रोकते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में काफी काम करना होगा। कृषि मंत्री ने कहा बिहार की मिट्टी अच्छी है। बाहर की उन्नत बीज से 10 प्रतिशत ज्यादा उत्पादन हो रहा है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय उन्नत बीज उत्पादन की दिशा में बेहतर काम कर रहा है।

किसानों की बेहतरी के लिए हम बिहार कृषि विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम करेंगे। हमारे विभाग में जो गड़बड़ियां है, उसे दूर किया जाएगा, ताकि राज्य के किसानों को समय पर उन्नत बीज मिल सके। उन्होंने ने कहा कि वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर खुलने का जो विश्वविद्यालय का प्रस्ताव है, उस पर भी विचार किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा कि जो मशीन इंसान को रिप्लेस करें हमें ऐसे कृषि यंत्रों की जरूरत नहीं है। टूल्स को हम कौशल विकास के लिए प्रयोग करेंगे। बिहार में पर्याप्त संसाधन नहीं रहने के बावजूद यहां की मिट्टी लोगों को खींच लाती है। कृषि के क्षेत्र में हम जहां हैं, वहां से पीछे नहीं लौट सकते हैं। कृषि के क्षेत्र में काफी स्कोप है। मौसम के हिसाब से शोध करने की आवश्यकता है, ताकि किसानों को लाभ मिल सके।

Edited By: Shivam Bajpai

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