पूर्णिया [जेएनएन]। 14 अगस्‍त की मध्‍य रात्रि को भारत आजाद हुआ था। 1947 में इस दिन मध्‍य रात्रि को ही पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नई दिल्‍ली के लालकिला से ध्‍वजारोहण कर राष्‍ट्र को संबोधित किया था। इसी परंपरा को आज भी लोग पूर्णिया में जिंदा रखे हुए हैं। यहां भी एक जगह मध्‍य रात्रि को ही तिरंगे झंडे को फहराकर लोग उनहें सलामी देते हैं।

73वें स्‍वतंत्रता दिवस पर स्थानीय झंडा चौक पर 14 अगस्त की मध्यरात्रि को झंडोत्तोलन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या स्थानीय लोग उपस्थित थे। बाजार के बीचों-बीच चौक होने के कारण समारोह में दुकानदारों की भी अच्‍छी संख्‍या थी।

झंडोत्तोलन समारोह में मौजूद मराठा बताते हैं कि 1947 में 14 अगस्त की मध्य रात्रि में ही आजादी की घोषणा की गई थी। लिहाजा यहां के लोग इस परंपरा को आजादी के साल से ही निभा रहे हैं। जब देश आजाद हुआ था उस समय यहां के स्वतंत्रता सेनानी शमशूल हक ने अहम योगदान दिया था। उस वक्त के स्वतंत्रता सेनानियों में शमशूल हक काफी समय तक जीवित रहे और इस परंपरा को जारी रखा।

जब तक वे जीवित रहे हर 14 अगस्त की रात्रि को झंडा चौक पर तिरंगा फहराने की अगुआई करते रहे। उनके गुजर जाने के बाद भी यह परंपरा कायम है।

Posted By: Dilip Shukla

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