जागरण संवाददाता, भागलपुर। बिहार का यह आइपीएस शहर का कानून व्‍यवस्‍था जानने के लिए थाने में पहुंच गए। वहां पहुंचते ही ड्यूटी पर तैनात दारोगा से चोरी की रपट लिखने को कहा। इतना सुनते ही दारोगा साहब से लेकर सिपाही तक साहब को लताड़ने लगे। लेक‍िन अगले ही पल माथे पर पसीने आने लगे, जब थाने में मौजूद दारोगा और सिपाही को पता चला कि थाने में रपट लिखाने खुद 'सुपर कॉप' चलकर आए हैं।  

दरअसल, एसएसपी देर रात रविवार को अपने आवास से टोपी और मास्क लगा जीन की पैंट और क्रीम कलर की हुडी पहन कर एक बाडीगार्ड को भी आम आदमी बना कर पैदल निकल गए। पैदल चौराहे पर पुलिसिंग का हाल जाना फिर कचहरी चौक होते जोगसर थाने पहुंच गए। अंदर ओडी अफसर, संतरी आदि को देखते हुए वहां मौजूद अवर निरीक्षक एचएन सिंह से कहा कि थाने के बाहर से उनकी बाइक किसी ने चुरा ली है। इतना सुनते ही दारोग़ा जी भड़क गए।

साहब को पहचान नहीं पाए बस बिदक गए। गुस्से से लाल होकर तेज आवाज में दांत पीस कर बोलने लगे कि ऐजी झूठ काहे बोल रहे हैं। कहीं और जगह बाइक छोड़ कर आ गए हैं और बोल रहे रहे हैं कि थाने के बाहर ही बाइक लगाई थी। थाने में सहायक अवर निरीक्षक पीके पांडेय, सिपाही धर्मेंद्र कुमार भी थे। सबने दारोग़ा जी के हां में हां मिला हड़का दिया। किस8 ने अपने एसएसपी बाबू राम को पहचाना नहीं।

एसएसपी आराम से यह बोलते रहे कि उनकी बाइक यहीं से गायब हुई, उधर सभी पुलिस अधिकारी और सिपाही उन्हें यह बोल हड़काते रहे कि उनकी बाइक वहां लगी ही नहीं थी। बाद में जब थानाध्यक्ष अजय कुमार अजनवी को जानकारी हुई तो वो थाने पहुंच सभी पदाधिकारियों और सिपाहियों को खरी खोटी सुना....बोले नौकरी लेकर ही तुमलोग दम लोगे। थानाध्यक्ष सोमवार को एसएसपी के कार्यालय पहुंचते ही सबको लेकर पुलिस कार्यालय पहुंच गए। बाहर काफी देर खड़े रहने के बाद तलब किये गए।

एसएसपी बाबू राम ने कहा कि थाने में आम आदमी से ऐसा व्यवहार अमानवीय है। मानवीय संवेदना से इतर ऐसे बुरा व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों की काउंसिलिंग की जा रही है। काउंसिलिंग बाद कार्रवाई भी की जाएगी। एसएसपी ने कहा कि गलत करने वाले किसी बजी थाने में कोई भी पुलिस पदाधिकारी या कर्मी हैं। वो बचेंगे नहीं। अपनी कार्यकुशलता दिखा बेहतर करने की कोशिश करें। ऐसे कुशल पुलिसकर्मियों और पदाधिकारियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। 

Edited By: Abhishek Kumar