भागलपुर [संजय सिंह]। दस रुपये के एक नोट में लाखों की रकम। नंबर बताते ही रुपयों से भरी अटैची संबंधित व्यक्ति के हवाले। नोटबंदी के बाद से ही छोटे-छोटे शहरों से भी हवाला के माध्यम से रुपये पहुंचाने के धंधे का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस अब वैसे शातिरों की तलाश कर रही है।

झारखंड के दुमका जिले के मसानजोर के पास 27 अगस्त की रात हुई लूट में हवाला का पैसा भी था। नोटबंदी के बाद शहर के ही दो व्यवसायियों ने इसकी शुरुआत की थी, यह बात पुलिस तक भी पहुंच चुकी है। धंधेबाजों ने भागलपुर, मुंगेर और बांका से कोलकाता जाने वाली बसों से रुपये भेजना शुरू किया।

भेजा जाता है सोना-चांदी भी

हवाला कारोबारी कभी-कभी रुपये के बदले सोना और चांदी भी बड़ी मात्रा में कोलकाता भेजते हैं। दुमका में पगला बाबा बस (कृष्णा रजत) में हुई डकैती के दौरान लुटेरों बड़ी रकम हाथ लगी है। मोटी रकम होने के कारण कोई भी व्यवसायी पुलिस के समक्ष यह कहने को तैयार नहीं है कि यह धन राशि उनकी है। इस मामले में दुमका पुलिस ने बस चालक लक्ष्मण महतो सहित मुंगेर, जमुई और बांका के पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया है। दस लोग अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं।

कमीशन में अच्छी रकम

हवाला के धंधे में मंदरोजा के रहने वाले दो भाइयों की संलिप्तता सामने आ रही है। रुपये भेजने के एवज में चालक और कंडक्टर को कमीशन के रूप में मोटी रकम दी जाती थी। यदा-कदा ये कारोबारी रुपये के बदले सोना और चांदी भी भेजते थे। इसमें दोहरी कमाई होती थी। कोलकाता में यदि सोने और चांदी की दर बढ़ी रहती थी, तो हवाला कारोबारी भागलपुर से हवाला की राशि से सोना और चांदी की खरीदारी करते थे और फिर इसे कोलकाता भेजते थे। कोलकाता में भागलपुर से भेजे गए सोने-चांदी को बाजार में बेचकर उन्हें दोहरा मुनाफा होता था। एक तो रुपये भेजने से कमीशन और दूसरा सोने-चांदी से भी कमाई।

सिल्क से भी जुड़ा है धंधा

भागलपुर से हवाला के माध्यम से सिर्फ रुपये भेजे ही नहीं जाते हैं, बल्कि मंगाए भी जाते हैं। यहां से कई कारोबारी अपने द्वारा तैयार किए गए माल दिल्ली और बेंगलुरू भेजते हैं। टैक्स बचाने के कारण ये पक्की रसीद नहीं देते हैं। वहां के व्यापारी हवाला के माध्यम से ही यहां भुगतान करते हैं। इसमें कई सफेदपोश शामिल हैं।

बैंकों में कड़ाई से बढ़ा है हवाला कारोबार

नोटबंदी के बाद बैंकों के कारोबार में पारदर्शिता आई है। मोटी रकम के लेनदेन पर आयकर विभाग की भी नजर रहती है। इस झंझट से बचने के लिए भी कुछ कारोबारियों ने हवाला का रास्ता चुना। एक कारोबारी ने बताया कि खाते में एक लाख तक के लेन-देन पर कोई टैक्स नहीं लगता है। राशि बढ़कर डेढ़ लाख हो जाती है तो व्यवसायियों को 236 रुपये टैक्स के रूप में भरने पड़ते हैं। लेकिन बस चालक कुछ हजार रुपये लेकर एक करोड़ तक की राशि आसानी से पहुंचा देता है।

रुपये प्राप्त करने वालों की ऐसे होती है पहचान

बस चालक या कंडक्टर को अटैची में भरकर रुपये दिए जाते हैं। उसमें अधिकांश नोट दो हजार अथवा पांच सौ के होते हैं। चालक को अटैची की चाबी सौंपते समय 10 रुपये का नोट भी दिया जाता है। कोलकाता में प्रवेश करने से पूर्व बने अड्डे पर हवाला कारोबार के एजेंट मुस्तैद रहते हैं। चालक या कंडेक्टर को जैसे ही कारोबारी का एजेंट 10 रुपये के नोट पर अंकित नंबर बताता है, वैसे ही उसे चाबी समेत अटैची थमा दी जाती है।

Posted By: Dilip Shukla

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