भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र]। नाथनगर के शाहपुर-अमरी विशनपुर दियारा के लोग 31 दिसंबर की रात को याद कर आज भी सिहर जाते हैं। 31 दिसंबर 2000 की रात वहां घुड़सवार बदमाशों ने सोए अवस्था में चार लोगों को गोलियों से भून डाला था। इस मामले को लेकर उस वक्त काफी विरोध प्रदर्शन हुआ था। पुलिस ने हंसी मंडल के बयान पर छह लोगों पर केस दर्ज किया था। इस चर्चित नरसंहार के 19 साल बीत जाने के बाद भी आरोपितों को पुलिस सजा नहीं दिलवा पाई है। न्यायालय के अनुरोध के बाद भी पुलिस समेत अभियोजन पक्ष के तमाम पदाधिकारी नरसंहार के वादी हंसी मंडल की गवाही अब तक नहीं करा सके हैं।

केस दर्ज कराने वाले का नहीं है कोई पता

इस चर्चित नरसंहार में अदालत के फैसले का लोग इंतजार कर रहे हैं, लेकिन फैसला इसलिए नहीं हो रहा कि इस नरसंहार का केस दर्ज कराने वाले हंसी मंडल का कोई अता-पता ही नहीं है। न्यायालय की मानें तो हंसी मंडल की गवाही कराने में अभियोजन पक्ष (लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक, एसएसपी और जिलाधिकारी) की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया। मामले की सुनवाई अष्टम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एमपी सिंह की अदालत में चल रही है। न्यायाधीश ने गवाही कराने का कई मौका दिया, लेकिन वादी की उपस्थिति नहीं हुई। इसके लिए 21 अगस्त 2019 को पत्र भी लिखे गए थे, लेकिन डीएम और एसएसपी ने न्यायालय की ओर से भेजे गए पत्र का जवाब तक देना जरूरी नहीं समझा।

22 नवंबर को नहीं हुई गवाही तो बंद हो जाएगा केस

डीएम और एसएसपी द्वारा न्यायालय के पत्र का जवाब नहीं दिए जाने के बाद अब न्यायाधीश ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिख कर गवाहों को उपस्थित कराने का अनुरोध किया है। न्यायाधीश एमपी सिंह ने गवाह को उपस्थित कराने के लिए 22 नवंबर को अंतिम मौका दिया है। न्यायालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि इस तिथि पर गवाह को उपस्थित कराने में सक्षम नहीं होने पर साक्ष्य के अभाव में केस को बंद कर दिया जाएगा।

घुड़सवारों ने कहा था, कहां है रे गणेशवा...फिर गूंजने लगीं गोलियों की तड़तड़ाहट

दियारा के लोग बताते हैं कि 31 दिसंबर की आधी रात को बदमाश घोड़े पर सवार होकर आए थे। गणेश मंडल के बासा के पास पहुंचे थे। बदमाशों ने कहा था...कहां है रे गणेशवा और फिर गोलियां बरसानी शुरू कर दी। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका थर्रा गया। उस वक्त बासा में गणेश मंडल, सहदेव मंडल, सुदीन मंडल और अमृत मंडल सो रहे थे, चारों को बदमाशों ने मौत के घाट उतार दिया। इस मामले में हंसी मंडल के लिखित बयान पर पुलिस ने धनंजय कुमार राय उर्फ धारो राय, बबन राय, मृत्युंजय राय, निरंजन उर्फ फंटुश राय, पवन कुमार सिंह व टुनटुन राय पर केस दर्ज किया। मामला सिल्क के धागे की तस्करी में रोड़ा डालने से जुड़ा था।

Posted By: Dilip Shukla

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