NPS के खिलाफ भागलपुर में गरजीं शिक्षक-कर्मचारी यूनियनें! पुरानी पेंशन बहाली और ठेका प्रथा खात्मे को आर-पार की जंग
OPS Convention: भागलपुर में शिक्षक और कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली और संविदा प्रथा के खात्मे की मांग ...और पढ़ें

OPS Convention: भागलपुर पेंशनर भवन में आयोजित शिक्षक व कर्मचारी कन्वेंशन में पुरानी पेंशन बहाली का संकल्प लेते गोपगुट व विभिन्न संघों के प्रतिनिधि
HighLights
पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग।
संविदा और ठेका प्रथा समाप्त करने पर जोर।
भागलपुर में शिक्षक-कर्मचारियों का विशाल कन्वेंशन।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। OPS Convention: पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की पुनर्बहाली और सरकारी विभागों में जारी संविदा, आउटसोर्सिंग व ठेका प्रथा के पूर्ण खात्मे की मांग को लेकर भागलपुर में शिक्षक और कर्मचारियों ने हुंकार भरी है। बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोपगुट) की भागलपुर जिला शाखा के तत्वावधान में शहर के पेंशनर भवन में रविवार को एक दिवसीय विशाल शिक्षक एवं कर्मचारी कन्वेंशन का आयोजन किया गया।
कन्वेंशन में विभिन्न विभागों के 200 से अधिक कर्मचारी, शिक्षक और प्रतिनिधि एकत्र हुए और सरकार की मजदूर व कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ने का साझा संकल्प लिया।
हक और अधिकार के प्रति सजग रहने का आह्वान, राज्य नेतृत्व रहा मौजूद
जिलाध्यक्ष ब्रजराज कुमार चौधरी एवं जिला सचिव राकेश अम्बष्ट द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कन्वेंशन में मुख्य रूप से महासंघ (गोपगुट) के राज्य अध्यक्ष निरंजन कुमार सिन्हा, राज्य महासचिव प्रेमचंद कुमार सिन्हा, राज्य सचिव गोपाल पासवान, पूर्णिया के जिलाध्यक्ष पवन कुमार जयसवाल और नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) बिहार प्रदेश इकाई के मुख्य समन्वयक शशि कांत शशि की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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वक्ताओं ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा पुरानी पेंशन समाप्त कर जबरन एनपीएस (NPS) थोपना कर्मचारियों के बुढ़ापे की लाठी छीनने जैसा है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कर्मियों और शिक्षकों को उनके संवैधानिक हक व अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा शोषणकारी संविदा प्रथा के खिलाफ एक मंच पर लाना था।
संविदा और NPS से सामाजिक व आर्थिक असुरक्षा
कन्वेंशन के मंच से राज्य सरकार द्वारा विभागों में नियमित बहाली के स्थान पर लगातार की जा रही संविदा और आउटसोर्सिंग नियुक्तियों पर कड़ा प्रहार किया गया। कर्मचारी नेताओं ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि किस तरह एनपीएस कर्मियों के भविष्य को बाजार के जोखिमों के हवाले कर रहा है और संविदा प्रथा से शिक्षित युवाओं का सामाजिक व आर्थिक शोषण हो रहा है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारियों का बुनियादी हक है, जिसे किसी भी कीमत पर हासिल किया जाएगा।
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प्राथमिक से लेकर पुलिस व विश्वविद्यालय संघों का मिला समर्थन
इस महाजुटान की खास बात यह रही कि इसमें राज्य के लगभग सभी छोटे-बड़े संघों ने एक मंच पर आकर एकजुटता दिखाई। कनवेंशन में बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ (गोप गुट), 34540 शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ, BPSC शिक्षक संघ, और बिहार राज्य शिक्षक फेडरेशन (STF) के प्रतिनिधियों ने जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई।
इसके अतिरिक्त रेलवे, आयकर (इनकम टैक्स) विभाग, स्वास्थ्य सेवा संघ, बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) सबौर एवं तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मी, बिहार पुलिस एसोसिएशन, बिजली मजदूर संघ, नगर निगम कर्मचारी संघ, तथा बंदोबस्त सह चकबंदी विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए।
दिनभर चले इस सत्याग्रह मंथन में विभिन्न संघों के वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए संयुक्त समन्वय समिति बनाकर आंदोलन को गांव से लेकर राजधानी तक ले जाने का ऐलान किया। अंत में सभी ने एक स्वर में सरकार को चेताया कि यदि पुरानी पेंशन जल्द बहाल नहीं की गई तो कर्मचारी कार्य बहिष्कार के लिए बाध्य होंगे।
