भागलपुर [जेएनएन]। आनंदराम ढांढनिया सरस्वती विद्या मंदिर में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन नई दिल्ली (Indian Institute of Mass Communication New Delhi) के पूर्व निदेशक केजी सुरेश ने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में स्वामी विवेकानंद का अमूल्य योगदान रहा है।

उन्होंने कहा कि बहुत कम लोगों को पता है कि जमशेदपुर में टाटा स्टील फैक्ट्री स्वामी जी के प्रेरणा की ही देन है। विवेकानंद ने युवाओं में देशभक्ति का भाव जगाया। उन्होंने भयमुक्त होकर विदेशी दासता के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। विवेकानंद ने दीन, दुखी, गरीब, असहाय, निरीह, सेवाभावी लोगों को देवता मानकर उनकी सेवा करने के लिए सभी को आह्वान किया। स्वामी विवेकानंद ने शारीरिक और स्नायु शक्ति का समान रूप से अभिवृद्धि पर जोर दिया।

स्वामी जी ने कहा था कि समाज में महिलाओं को समानता दिए बगैर कोई भी राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता। वे अस्पृश्यता के विरुद्ध थे तथा समाज में व्याप्त जातिवाद पर उन्होंने दुख व्यक्त किया था। विवेकानंद जातिवाद को समाज का कोढ़ मानते थे। उन्होंने युवाओं को देश के लिए जीने और मरने का आह्वान किया था। विवेकानंद ने भारत के पुनर्जन्म की आधारशिला रखी थी।

इस अवसर पर डॉ सुनीत कुमार ने स्वामी जी के शक्तिदायी विचारों से प्रेरणा लेकर देश और समाज के लिए समर्पित होने का सभी से आह्वान किया। प्रोफेसर भोला कुमार ने एक भारत विजयी भारत विवेकानंद शिला स्मारक कन्याकुमारी के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम तथा विवेकानंद केंद्र की गतिविधियों की जानकारी कार्यक्रम में सभी को दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो गुरुदेव पोद्दार ने किया। मंच संचालन नमन मिश्रा और धन्यवाद ज्ञापन प्रो राजभूषण प्रसाद ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से 'एक भारत विजयी भारत' के प्रांत संयोजक राकेश सिन्हा, प्रांत संगठक मुकेश कीर के अलावा प्रांत संपर्क प्रमुख डॉक्टर विजय वर्मा उपस्थित थे। समारोह में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के भी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

11 सितंबर की तारीख हमेशा सभी भारतीयों के लिए खास और गर्व करने का दिन है। दरअसल आज ही के दिन महान युवा विचारक और आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो शहर में विश्व धर्म संसद में शामिल होकर हिंदू धर्म और दर्शन पर भाषण देकर भारत को विश्व पटल पर एक नई पहचान दी। स्वामी विवेकानंद ने इस भाषण के जरिए भारत की आध्यात्मिक और दर्शन का परिचय पूरे विश्व को करवाया। अपने संक्षिप्त भाषण में स्वामी विवेकानंद हिंदू धर्म के विराट, वैभव और दार्शनिक संपदा को बहुत ही आकर्षक तरीके से पश्चिम की संस्कृति को सामने रखा।

Posted By: Dilip Shukla

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