भागलपुर [जेएनएन]। अखंड सीताराम नाम धुन का आदमपुर में समापन हो गया। इस मौके पर स्वामी आगमानंद जी महाराज ने कहा कि गंगा की धारा तो सीमित क्षेत्र में ही बहकर गंगा सागर में मिल जाती है, लेकिन ईश्‍वर नाम रूपी गंगा हर क्षेत्र के जनमानस का कष्ट हरती है।

उन्होंने चैतन्य महाप्रभु की चर्चा करते हुए कहा कि पूरा भारत संकट में था और सनातन धर्म पर कुठाराघात हो रहा था, उस समय चैतन्य महाप्रभु ने भारत के विभिन्न प्रांतो में नाम रूपी गंगा प्रवाहित की। उसी नाम रूपी गंगा को अंगक्षेत्र में महात्मा भोली बाबा ने प्रचारित प्रसारित किया। चारों युगों और चारों वेदों में नाम के प्रताप को बताया गया है।

मानस कोकिला कृष्णा मिश्रा ने कहा कि नाम प्रारब्ध को भी काट देता है। राजीव कांत मिश्र ने कहा कि भगवान्नाम से वातावरण प्रदूषण रहित हो जाता है। संकीर्तन में प्रतिकुलपति प्रो. रामयतन प्रसाद, प्रो. ज्योतिन्द्र चौधरी, प्रो. दमन चंद्र मिश्र, प्रो. रामसेवक सिंह, प्रो. अशोक ठाकुर, डॉ. रीना झा, डॉ. मयंक वत्स आदि मौजूद थे।

Posted By: Dilip Shukla

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