जागरण संवाददाता, सुपौल। इसे अन्नदाताओं की मानसिकता में बदलाव कहें या फिर विभागीय मेहरबानी अब यहां के किसानों का झुकाव बागवानी की ओर होने लगा है। जिले में बागवानी आधारित खेती का रकबा बढऩे लगा है। कुछ दिन पहले की बात करें तो यहां के किसानों की रुची बागवानी खेती को लेकर नहीं के बराबर थी। यहां की किसानी में मुख्य रूप से धान व गेहूं शामिल थे परंतु हाल के दिनों में यहां के किसानों का झुकाव बागवानी खेती की ओर बढ़ा है। सरकार भी बागवानी खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दे रही है जिससे किसान बागवानी को अपनाना शुरू कर दिए हैं। आम, केला, लीची के अलावा सरकार पपीता और बेर की खेती के लिए किसानों को अनुदान दे रही है।

बढऩे लगा है किसानों का रुझान

वैसे तो बागवानी आधारित खेती इस इलाके की खान पहचान हुआ करती थी। खासकर आम की खेती यहां बहुतायत मात्रा में की जाती थी। यहां से आम अन्य प्रदेशों को भेजे जाते थे। परंतु बदलते परिवेश के साथ इसकी खेती में कमी आई। अब जब सरकार ने बागवानी आधारित खेती को बढ़ावा दिया है तो एक बार फिर से किसानों का रुझान इस ओर बढ़ा है। अब यहां के किसान आम के साथ केला, अमरुद पपीता की खेती करने लगे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने विभाग को जिले में बेेर की खेती का लक्ष्य दे रखा है। यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो आनेवाले दिनों में इस जिले में तरह-तरह के बगान दिखेंगे।

बगानों का लक्ष्य हुआ निर्धारित

चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने जिले में आम, केला, लीची, अमरुद के साथ-साथ पपीता और बेर की खेती को लेकर विभाग को लक्ष्य दिया है। इसमें आम के लिए चार हजार हेक्टेयर, लीची के लिए तीन हजार हेक्टेयर, अमरुद के लिए एक हजार हेक्टेयर, पपीता के दो सौ हेक्टेयर तथा बेर की खेती के लिए एक सौ हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा स्ट्राबेरी और शिमला मिर्च का भी लक्ष्य दिया गया है। फिलहाल इन सभी खेती पर सरकार ने जो अनुदान की राशि तय की है उसके मुताबिक 60 फीसद अनुदान किसानों को दिया जाएगा। प्रथम वर्ष 20 तथा दूसरे व तीसरे वर्ष 20-20 फीसद अनुदान दिया जाएगा। फिलहाल इन सभी खेती के लिए विभाग किसानों से आवेदन ले रहा है। विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में यहां विभिन्न प्रकार की बागवानी देखने को मिलेगी इससे किसान समृद्धि होंगे।

 

Edited By: Abhishek Kumar