भागलपुर [राम प्रकाश गुप्ता]

सृजन घोटाले का आकार अब 1900 करोड़ के पार पहुंच गया है। सरकार की ऑडिट रिपोर्ट में इसका पता चला है। 625 पेज की रिपोर्ट में सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौर से उपकृत होने वालों की लंबी सूची है। कार्रवाई के दायरे में कई पूर्व डीएम और कई सीनियर अफसर आएंगे। राज्य स्तर के आधा दर्जन पदाधिकारी ऑडिट रिपोर्ट की समीक्षा कर रहे हैं।

गत अगस्त माह में घोटाला उजागर होने के बाद सरकार ने ऑडिट कराने का निर्देश दिया था। इससे पहले सीबीआइ की जांच में 1600 करोड़ के करीब सरकारी राशि की अवैध निकासी का पता चला था। अब घोटाले का आकार 300 करोड़ और बढ़ गया है।

11 महीने लगे ऑडिट में

ऑडिट का कार्य करीब 11 महीने में पूरा हुआ है। रिपोर्ट पटना में निबंधक, सहयोग समितियो को सौंपी गई है। रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए निबंधक ने सात सदस्यीय टीम का गठन किया है। यह टीम ऑडिट रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है। इसके बाद उच्चस्तरीय टीम इसके दायरे में आने वाले 'वीआइपी' के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई की अनुशंसा करेगी। चर्चा है कि सूची में पिछले एक दशक से अधिक समय में संस्था से उपकृत होने वाले कई आइएएस, डिप्टी कलेक्टर, राजनीतिक दलों से जुड़े लोग, जनप्रतिनिधि, मीडिया प्रतिनिधियों के नाम हैं। अंकेक्षण के दौरान सृजन संस्था की डायरी, सफेद व लाल रजिस्टर तथा छोटे-छोटे नोटबुक में की गई इंट्री में लिखे तथ्य को भी शामिल किया गया है। सृजन के व्यापार का फलक बढ़ने की भी चर्चा की गई है। किस तरह छोटे से कारोबार करने वाली यह संस्था करोड़ों का कारोबार करने वाली बन गई। रिपोर्ट में उन महिलाओं के भी नाम हैं जिन्होंने यहां काम किया और दैनिक मजदूरी कर राशि सृजन बैंक में जमा किया। गरीब महिलाओं की जमा राशि का किस तरह उपयोग किया जाता था, इसकी भी चर्चा है। ऐसे हजारों महिलाओं की राशि वापसी की अनुशंसा भी रिपोर्ट में की गई है। बड़े लोगों ने यहां से लोन लेकर कैसे अपने व्यापार को बढ़ाया, इसका भी उल्लेख है।

सूत्र बताते हैं कि अब गेंद विभाग की निबंधक के पाले में है। गत वर्ष सृजन घोटाला उजागर होने के बाद जहां सीबीआइ कानूनी पक्ष को ध्यान में रखकर जांच कर रही है वहीं सहकारिता विभाग से निबंधित संस्था होने के कारण विभाग ने भी इसकी ऑडिट कराई थी।

Posted By: Jagran