भागलपुर [जेएनएन]। बिहार राज्य परिवहन निगम का डिपो व डिक्सन मोड़ स्थित निजी बस स्टैंड बदहाली और बदइंतजामी का शिकार है। जिससे बस स्टैंड आने और जाने वाले यात्रियों सहित मोटर मालिकों और उनके स्टाफ को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बस स्टैंड से रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पूर्णिया, कटिहार, खगडिय़ा, बेगूसराय, किशनगंज, अररिया, बांका, देवघर, गोड्डा, दुमका, रांची, जमशेदपुर, कोलकाता, पटना सहित आदि स्थानों की ओर यात्रा करते हैं। बस स्टैंड की दशा को देखकर कई संभ्रांत नागरिक लौट जाते हैं। पूरे बस स्टैंड की सड़क उखड़ी हुई है। डिक्सन मोड़ बस स्टैंड बारिस के मौसम में तालाब में तब्दील हो गया है। पूरे परिसर में पानी और कीचड़ पसरा है। यात्रियों के लिए बने विश्रामगृह को लोगों ने बाइक स्टैंड बना दिया है। जर्जर शौचालय है। लंबे समय से बस स्टैंड के हाल-बेहाल बने हुए है। यही हाल तिलकामांझी बरारी रोड स्थित बस डिपो की है। डिपो परिसर की सड़क उखड़ गई है। बैठने के लिए मात्र कुछ एक कुर्सियां हैं। ज्यादातर यात्रियों को जमीन पर बैठकर ही बस की प्रतिक्षा करनी होती है। साफ-सफाई भी नियमित नहीं कराई जाती है। चारों ओर कचरा पसरा हुआ है।

बंगलुरु की तर्ज पर स्टैंड को विकसित करने की थी योजना

वर्ष 2009-10 में बिहार के तत्कालीन प्रधान सचिव एवं राज्य परिवहन निगम के प्रशासक उदय सिंह कुमावत ने भागलपुर समेत सूबे के बड़े शहरों के राज्य ट्रांसपोर्ट डिपो को हाईटेक बनाने की योजना बनाई थी। इन बस स्टैंडों को बंगलुरू की तर्ज पर विकसित किया जाना था। इसके अंतर्गत 11 बीघा क्षेत्रफल में फैले बरारी रोड स्थित बस डिपो में महिला और पुरुष यात्रियों के लिए डिलक्स शौचालय, स्नानागार, विश्रामगृह, यात्री शेड में पर्याप्त कुर्सियां, कंप्यूटराइज्ड टिकट काउंटर सभी तरह की सुविधा मुहैया कराने की योजना बनाई गई थी। पेयजल के लिए जगह-जगह नल की व्यवस्था की जानी थी। साथ ही होटल, शापिंग मॉल बनाने की योजना थी। गाडिय़ों की मरम्मत के लिए हाईटेक वर्कशाप, जिसमें आधुनिक लेथ मशीन, बोङ्क्षरग मशीन, वेल्डिंग मशीन की व्यवस्था की जानी थी।

मल्टीप्लेक्स भवन का होना था निर्माण

डिपो स्थित पुराने भवन को तोड़कर मल्टीप्लेक्स का निर्माण कराए जाने की योजना थी। यह काम पीपीपी के तहत करने की योजना थी। एक सौ करोड़ का स्टीमेट भी बन गया था। लेकिन, समय के साथ यह योजना ठंडे बस्ते में चला गया है। राज्य ट्रांसपोर्ट बस डिपो हाईटेक होने की जगह और बदहाल हो गया।

विश्रामगृह बन गया है बाइक स्टैंड

तिलकामांझी स्थित डिपो व डिक्सन मोड़ स्थित प्राइवेट बस स्टैंड, दोनों स्टैंडों में यात्री सुविधाओं का अभाव है। प्राइवेट बस स्टैंड में विश्रामगृह कहने को है। विश्रामगृह तो है लेकिन, लोगों ने उसे बाइक स्टैंड बना दिया है। कुछ सीमेंट की कुर्सियां पर यात्री बैठकर बस की प्रतिक्षा करते हैं। अधिसंख्य यात्रियों को खूले में जमीन पर बैठकर समय गुजारना पड़ता है।

खरीद कर यात्री एवं कर्मियों को पीना पड़ता है पानी

दोनों स्टैंडों में से कही पर यात्रियों के लिए साफ पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई है। डिपो में एक चापाकल है। लेकिन उससे कभी कभी साफ पानी नहीं निकलता है। डिक्सन मोड़ के स्टैंड में तो चापाकल भी नहीं है। इससे यात्रियों को बोतल बंद पानी खरीद कर पीना पड़ता है।

बदबूदार शौचालय, नाक पर रूमाल रख जाते हैं यात्री

दोनों बस स्टैंड में शौचालय तो हैं। लेकिन रखरखाव व साफ-सफाई के अभाव में लोग उसका उपयोग करने से कतराते हैं। मजबूरी में अगर यात्रियों को जाना भी होता है तो नाम पर रूमार रख कर जात हैं। शौचालय में दरवाजा तक नहीं है। महिला यात्रियों को इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

वक्र्सशॉप में केवल वेल्डिंग मशीन

डिपो स्थित वकर्सशॉप में वेल्डिंग मशीन छोड़ अन्य कोई मशीन नहीं है। इसकी वजह से गाडिय़ों को पटना सेंट्रल वक्र्सशॉप भेजना पड़ता है, या फिर जीरोमाइल, मोजाहिदपुर में प्राइवेट मिस्त्री के पास ले जाना पड़ता है। भागलपुर से देवघर तक चलने वाली बस को एक महीने पहले मरम्मत के लिए पटना भेजा गया है। लेकिन, अभी तक वापस नहीं आई है। इससे देवघर के लिए बस सेवा बंद है।

मैनुअल काटी जाती है टिकट

सात साल पूर्व ई-टिकटिंग मशीन डिपो को उपलब्ध कराया गया था। लेकिन कुछ दिनों बाद ही मशीन मुख्यालय को वापस लौट गया। काउंटर और बसों में मैनुअल टिकट काटी जा रही है।

भागलपुर में नहीं है अब तक एक भी स्थाई बस पड़ाव

स्मार्ट सिटी में स्थाई निजी बस पड़ाव भी नहीं बन सका है। डिक्शन रोड में मालगोदाम और जीरोमाइल के पास रेलवे की जमीन पर स्टैंड चल रहा है। साढ़े तीन साल पूर्व बागबाड़ी में निजी बस पड़ाव बनाने की योजना थी। लेकिन वहां भागलपुर हाट बनाया गया। हालांकि जीरोमाइल के पास हाल में स्टैंड के लिए जमीन तलाशी गई है। लेकिन अबतक इस दिशा में कोई कारगर पहल नहीं की जा सकी है।

डिपो में पेयजल सुविधा के लिए होगा बोरिंग

राज्य ट्रांसपोर्ट के क्षेत्रीय प्रबंधक अशोक कुमार सिंह का कहना है कि हाईटेक डिपो बनाने के लिए एक सौ करोड़ का स्टीमेट बना था। पीपीपी के तहत काम होना था। शुद्ध पेयजल के लिए डिपो परिसर में बोरिंग होगा। ट्रीटमेंट प्लांट लगेगा। दस नल लगेंगे। पीएचईडी को तकनीकी स्वीकृति के लिए भेजा गया है। इसमें साढ़े तीन लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। भागलपुर डिपो से 40 बसों से अधिक का परिचालन हो रहा है। जिसमें मुंगेर डिपो की 15 गाडिय़ां शामिल हैं।

बोले यात्री

सरकारी हो या अस्थाई निजी बस पड़ाव कहीं भी यात्रियों के लिए शौचालय और पानी की व्यवस्था नहीं है। इसकी वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। -सोनू शर्मा, छात्र

बस स्टैंडों में बैठने तक की अच्छी व्यवस्था नहीं है। जलजमाव और कीचड़ के कारण चलना दूभर है। शौच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। -हरिनारायण सिंह, वरिष्ठ नागरिक

स्टैंडों में न तो बैठने की अच्छी व्यवस्था है औ न ही पेयजल की व्यवस्था। जरूरत पडऩे पर शौचालय नहीं रहने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। -मधुर मोहन मंडल, लोदीपुर तहबलपुर।

स्मार्ट सिटी के बस स्टैंड में इतनी खराब व्यवस्था होगी सोचा भी नहीं था। जम्मू के कसवा से भी बदतर स्थिति है। बस पड़ाव में हर जगह गंदगी पसरा हुआ है। -जसवंत सिंह, जम्मू-कश्मीर

सरकारी बस स्टैंड में कोई सुविधा ही नहीं है। जर्जर शौचालय के कारण शौच के लिए झाड़ी में जाना पड़ता है। बाजार से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। -मुन्ना सिंह, बस कंडक्टर

राज्य ट्रांसपोर्ट डिपो में चालकों के लिए आराम करने की भी व्यवस्था नहीं है। मंदिर में आराम करने को मजबूर होना पड़ता है। न तो शौचालय और न ही पेयजल की यहां व्यवस्था है। -डब्लू साह, बस चालक।

छह माह पूर्व हाईकोर्ट ने डीएम को तीन-चार माह में निजी बस स्टैंड बनाने का निर्देश दिया था। लेकिन अबतक इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। -फोटो मिश्रा, स्टैंड किरानी।

मालगोदाम स्टैंड से विभिन्न रूट की एक सौ गाडिय़ां चलती है। आठ-दस हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। लेकिन यहां शौचालय, पानी और बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। -सुनील कुमार, स्टैंड किरानी

निजी बस पड़ाव की बदतर स्थिति के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से दिन ढलते स्टैंड परिसर अंधेरे में डूब जाता है। -मुकेश कुमार यादव, बस कर्मी

जलजमाव के कारण बस खड़ी करने की गंभीर समस्या है। शौचालय और पानी की व्यवस्था नहीं होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खरीदकर पानी पीना पड़ता है। -शंभू झा, बस चालक।

Posted By: Dilip Shukla

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