मां शैलपुत्री की पूजा से नवरात्र आरंभ, भक्तिरस में डूबा भागलपुर, गंगा ने समेटा रौद्र रूप; खिल उठे कमल व अड़हुल के फूल
Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही भागलपुर भक्तिमय हो गया है। मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के ...और पढ़ें

Shardiya Navratri 2026: मां शैलपुत्री की पूजा से शुरू हुई साधना
HighLights
मां शैलपुत्री की पूजा से शारदीय नवरात्र का हुआ शुभारंभ।
भागलपुर भक्तिमय, दुर्गा पूजा पंडालों की भव्य तैयारी जारी।
गंगा का रौद्र रूप शांत, मौसम भी हुआ अनुकूल।
ललन तिवारी, भागलपुर। Shardiya Navratri 2026: गंगा की कलकल बहती लहरों पर जैसे आस्था की दिव्य तरंगें उतर आई हों, शिवालयों और दुर्गास्थानों में जलते दीपों की लौ जैसे अंतर्मन में श्रद्धा का उजियारा भरने लगी हो और घर-आंगन में गूंजते देवी गीत मानो जगतजननी के आगमन का मंगलगान कर रहे हों। शारदीय नवरात्र के शुभारंभ के साथ ही सिल्क सिटी भागलपुर की संपूर्ण आबो-हवा भक्तिरस में पूरी तरह सराबोर हो उठी है।
कहीं प्रथम स्वरूपा मां शैलपुत्री की आराधना में लीन साधक हैं, तो कहीं धूप-दीप, अक्षत और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नौ दिवसीय अखंड अनुष्ठान का संकल्प लिया गया है। देवी दुर्गा के कर्णप्रिय भजनों और शंखध्वनि से पूरा वातावरण गुंजायमान है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो मां भवानी के स्वागत में पूरा शहर पलक-पांवड़े बिछाए बैठा हो और श्रद्धालुओं की आस्था की हिलोरें गंगा की लहरों के साथ कदमताल कर रही हों।
दीपों की लौ में दमक रही श्रद्धा
नवरात्र के पहले दिन रविवार को शहर के प्रमुख मंदिरों, शक्तिपीठों और मोहल्लों के दुर्गास्थानों में भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ नौ दिनों के कठिन संयम और साधना का आरंभ हुआ। घरों में शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर लोगों ने नियम, निष्ठा और पवित्रता की डोर थामी।
घर-घर शुरू हुई नौ दिनी साधना
पूजा स्थलों पर शाम ढलते ही महाआरती की दिव्य छटा देखने को मिली। दीपों की लंबी कतारें, गुग्गुल-धूप की सुगंध, पीतल की घंटियों की गूंज और मातृशक्ति के संवेत स्वर ने ऐसा सम्मोहक दृश्य रचा, जिसमें भक्ति का आलोक देर तक ठहरा रहा। गलियों और चौराहों पर बज रहे देवी गीतों के बीच श्रद्धालु मां से सुख, शांति, समृद्धि और समाज के कल्याण की कामना कर रहे हैं।
बंगाल की सांस्कृतिक छटा
बंगाल की सीमा और संस्कृति से निकटता के कारण भागलपुर के दुर्गोत्सव पर बंगाली परंपरा की अनूठी छाप साफ नजर आती है। यहां दुर्गा पूजा केवल अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और सामाजिक समरसता का महाकुंभ है। शहर के मारवाड़ी पाठशाला, कचहरी चौक, आदमपुर, खलीफाबाग, घंटाघर और बरहपुरा समेत तमाम इलाकों में पूजा पंडालों को भव्य व नयनाभिराम रूप देने में बंगाल और स्थानीय कारीगर दिन-रात जुटे हैं।
भागलपुर में सजे कलात्मक पंडाल
बांस-बल्लियों के विशाल ढांचे पर कलात्मक कपड़ों, थर्माकोल और रंग-बिरंगी रोशनी का संयोजन किया जा रहा है। वहीं, मूर्तिकार मां दुर्गा, भगवान गणेश, कार्तिकेय, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं। देवी के मुखमंडल की ममतामयी आभा, आभूषणों की बारीक नक्काशी और महिषासुर वध के मुद्रा की सजीवता देखते ही बन रही है।
गंगा ने समेटा रौद्र रूप
इस बार के शारदीय नवरात्र की सबसे सुखद और राहत भरी बात यह है कि स्वयं प्रकृति ने भी उत्सव की अगवानी में अपना मिजाज बदल लिया है। बीते दिनों गंगा के उफान ने भागलपुर के तटीय इलाकों में बाढ़ और जलभराव का खौफ पैदा कर दिया था। जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका था, जिससे घाटों पर पर्व की तैयारियों को लेकर संशय था।
प्रकृति भी बनी उत्सव की सहभागी
लेकिन अब गंगा की धारा शांत होकर सामान्य स्थिति की ओर लौट रही है। रौद्र रूप समेटने से गंगा घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान, कलश विसर्जन और स्नान की गतिविधियां फिर से सुगम होने लगी हैं। इसके साथ ही मौसम भी पूरी तरह अनुकूल हो चुका है। न चुभती धूप और न उमस भरी बेचैनी—हल्की गुलाबी ठंडक का अहसास श्रद्धालुओं को ऊर्जा दे रहा है।
प्रकृति के शृंगार का आलम यह है कि तालाबों में कमल के पुष्प खिल उठे हैं, जबकि बाग-बगीचों में मां भगवती के प्रिय लाल अड़हुल और नीले अपराजिता के फूल अपनी डालियों पर महक रहे हैं। गंगा का उतरता पानी, मौसम की नजाकत, फूलों की ताजगी और मंदिरों में गूंजती शंखध्वनि—सब मिलकर संदेश दे रहे हैं कि मां दुर्गे के आगमन पर भागलपुर की धरती और आकाश एक साथ नतमस्तक हैं।
