संवाद सूत्र शाहकुंड: प्रखंड में बीते गुरुवार की संध्या आई आंधी से शाहकुंड प्रखंड में विद्युत आपूर्ति भी चरमरा गई है। दर्जनों गांव में 72 घंटे से विद्युत आपूर्ति ठप है। जिससे उपभोक्ताओं में व्यापक आक्रोश देखने को मिल रहा है। वहीं, सबसे गंभीर समस्या पेयजल की उत्पन्न हो गई है। लोग खरीद खरीद कर पानी पीने को मजबूर हैं। मवेशी को पानी पिलाने के लिए तो लोग इधर-उधर भटक रहे हैं क्योंकि भूगर्भ जल काफी नीचे चले जाने के कारण चापाकल ने भी पानी उगलना बंद कर दिया है। नदी, तालाब सारे सूख चुके हैं। मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना अंतर्गत हर घर जल नल का आपूर्ति भी बाधित है। लोग त्राहिमाम की स्थिति में है।उपभोक्ता नवीन कुमार, पंकज कुमार, मिथिलेश कुमार, सुभाष, दिलीप, विनोद सहित दर्जनों उपभोक्ताओं ने बताया कि शाहकुंड विद्युत उपकेंद्र में कार्यरत कर्मी एवं कनीय अभियंता के मनमाने रवैए के कारण हम लोगों को विद्युत आपूर्ति से वंचित होना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि शाहकुंड विद्युत उपकेंद्र में अकबरनगर फीडर के कई गांवों में शनिवार की दोपहर बाद विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी गई है। लेकिन अकबरनगर फीडर के ही बेल्थू, सराहा, कपसौना, माणिकपुर, भीखनपुर सहित दर्जनों गांव में 72 घंटे से विद्युत आपूर्ति अभी भी ठप है। लोगों के मोबाइल भी डिस्चार्ज हो गए हैं। इस गर्मी में लोगों का जीना मुहाल हो गया है। लेकिन अभी तक इन गांव में विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी है। विद्युत विभाग के एक मानव बल ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि हमें सिर्फ अकेले ही पूरे क्षेत्र में गिरे तार को ठीक करने के लिए लगा दिया गया है। हमारे पास कोई संसाधन नहीं है। जबकि ग्यारह हजार केवीए के तार में व्यापक क्षति हुई है। बावजूद हमें कोई संसाधन मुहैया नहीं करवाई गई है। अकेले ही तार, पोल को ठीक कर रहे हैं। जबकि प्रखंड मुख्यालय के शाहकुंड बाजार में शनिवार की दोपहर को विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी गई है।वहीं सजौर थाना क्षेत्र में भी दर्जनों गांव म विद्युत आपूर्ति अभी तक ठप है। उपभोक्ताओं ने बताया कि कनीय अभियंता के लापरवाही से हम लोग त्राहिमाम हो चुके हैं। इधर कनीय अभियंता आशीष कुमार ने बताया कि ग्यारह हजार केभीए के तार में व्यापक क्षति हुई है। जिसके कारण विद्युत आपूर्ति बहाल करने में इतना विलंब हो पा रहा है। उन्होंने रविवार की सुबह तक विद्युत आपूर्ति बहाल होने की बात बताई। वहीं बिजली नहीं रहने से लोगों का जीना मुहाल हो गया है।

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