किशनगंज [अमितेष]। बिहार के कोसी-सीमांचल व मिथिलांचल, बंगाल के कूचबिहार, मालदा व इस्लामपुर के अलावा असम के शिवसागर व जोरहट से इकट्ठा किए गए मखाना के लगभग 260 जर्म प्लाज्म पर वैज्ञानिकों की टीम रिसर्च कर रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के तत्वाधान में भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज के वैज्ञानिक रिसर्च कर बेहतर प्रजाति विकसित करने में जुटे हैं।

रिसर्च में कम समय में उत्पादन, बेहतर इल्ड, बोल्ड सीड यानी यूनिफॉर्म मोड बीज, अधिक कीट व रोग प्रतिरोधक क्षमता, लावा बनने की क्षमता यानी पॉपिंग परसेंटेज, खर-पतवार नियंत्रण समेत तमाम गुणों को परखा जा रहा है। दरअसल, 2013 में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की पहल पर भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज में मखाना अनुसंधान परियोजना की शुरुआत की गई। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनिल के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने सर्वप्रथम बिहार, बंगाल व असम में जंगली फसल के रूप में पाए जाने वाले मखाना को लेकर सर्वेक्षण किया।

सर्वेक्षण के दौरान बिहार के 10 जिलों यथा मिथिलांचल के दरभंगा, मधुबनी व सीतामढ़ी, कोसी इलाके के सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया, कटिहार व किशनगंज, बंगाल के कूचबिहार, मालदा व इस्लामपुर और असम के शिवसागर व जोरहट से इकट्ठा कर मखाना के लगभग 260 जर्म प्लाज्म पर वैज्ञानिकों की टीम लैब से लेकर खेतों में अनुसंधान व अध्ययन में जुटी।

इस दौरान मखाना की उन्नतशील प्रजाति के तौर पर सबौर मखाना वन को विकसित करने में वैज्ञानिकों को पहली सफलता मिली। इसे बिहार राज्य बीज अधिनियम के तहत अनुशंसित भी किया जा चुका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे भी बेहतर प्रजाति के विकास के लिए अनुसंधान जारी है। जल्द ही बेहतर परिणाम आने की संभावना है। अनुसंधान में जुटे डॉ. अनिल कुमार बताते हैं कि मखाना उत्पादन तकनीक के साथ-साथ कीट एवं रोग प्रबंधन तकनीक भी विकसित की गई है। जलजमाव क्षेत्र की उत्पादकता, लाभप्रदता एवं स्वरोजगार सृजन हेतु मखाना उत्पादन तकनीक एक बेहतर विकल्प है।

डॉ. आर के सोहाने (निदेशक प्रसार शिक्षा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर) ने कहा कि किसानों के हित में मखाना के लगभग 260 जर्म प्लाज्म पर अनुसंधान किया रहा है। अब तक के अनुसंधान में सबौर मखाना वन प्रजाति विकसित की गई है। इससे भी बेहतर प्रजाति के विकसित होने की संभावना है, जिसके लिए अनुसंधान जारी है। किसानों के खेत में प्रदर्शन के बाद सबसे बेहतर प्रजाति को रिलीज किया जाएगा।

Posted By: Dilip Shukla

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