भागलपुर [जेएनएन]। शहर में अभी 15 करोड़ के पान मसाला का स्टॉक है। प्रतिबंध लगने के बाद इससे जुड़े कारोबारियों ने पान-मसालों को डंप कर लिया है। खुदरा दुकानदारों ने भी 50 हजार से एक लाख तक का माल डंप कर रखा है। खुदरा दुकानदार किसी तरह माल को खपाने में लगे हैं। प्रतिबंध के बावजूद पान मसालों की बिक्री होती रही। दुकानदारों में न तो फूड विभाग का डर दिखा और न ही पुलिस-प्रशासन का।

फेरीवाला नहीं, दुकानदार खुद ला रहे माल

गुमटी, ठेला और दुकान मिलाकर भागलपुर, नाथनगर, सबौर प्रखंड में तीन हजार के करीब दुकानों में पान-मसालों की बिक्री होती है। सभी जगह पान मसालों की आपूर्ति बाइक और साइकिल से फेरीवाला करता है। प्रतिबंध के दूसरे दिन फेरीवालों ने दुकानों में पान-मसाला नहीं पहुंचाया। ऐसे में दुकानदार खुद डीलरों जाकर पान मसाला खरीदे।

शहर में रोजाना करीब 33 लाख की बिक्री

पान मसाला के थोक दुकानदार ने बताया कि महीने में 10 करोड़ का कारोबार होता है। मतलब रोजना 33 लाख के करीब हर दिन लोग पान-मसाला खाते हैं।

पान मसालों की विक्रेता पर कसा जाएगा शिकंजा

फूड इंस्पेक्टर मु. इकबाल ने बताया कि पान मसालों की पर प्रतिबंध के बाद बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। इसके लिए पुलिस की मदद से छोटे से बड़े दुकानदारों पर शिकंजा कसा जाएगा।

टैक्स की राशि के लिए सरकार से लगाएंगे गुहार

पान मसालों के थोक दुकानदारों ने कहा कि सभी माल जीएसटी देने के बाद लाया जाता है। इसका बिल और रसीद है। अब अचानक इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है तो टैक्स की राशि के लिए सरकार से गुहार लगाएंगे। कुछ मोहलत मांगी जाएगी। संबंधित पान मसालों के मालिकों से आपूर्ति किए गए माल को वापसी के लिए कहा जाएगा।

हर महीने 10 करोड़ के पान-मसाला का होता है कारोबार

जिले में हर महीने 10 करोड़ रुपये के पान-मसाला का कारोबार होता है। बुधवार से इस पर प्रतिबंध के बाद कारोबारियों में हड़कंप है। कारोबारी और इससे जुड़े कर्मचारियों ने दूसरा विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। कई दुकानों से रखे पान-मसाला को दुकानदार हटाते दिखे।


दरअसल, शहरी क्षेत्र में 3000 से ज्यादा छोटे और बड़े दुकानों में पान-मसाला की बिक्री होती है। दुकानों पर पान-मसाला की आपूर्ति करने के लिए 100 फेरी वाले हैं। पान-मसाला से जुड़े कारोबारियों ने कहा कि सरकार का यह तुगलकी फरमान है। गुटखा पर 88 फीसद जीएसटी लगता है। पान-मसाला कारोबारी राजेश जैन ने बताया कि हर महीने पांच करोड़ का टर्नओवर है। ढाई करोड़ जीएसटी देकर मंगवाया गया है। ऐसे में एकाएक बंद होने से परेशानी बढ़ गई है। सरकार को जीएसटी नियम के तहत पैसे वापस करने चाहिए। पान मसाला की कई कंपनियों पर प्रतिबंध नहीं लगा है। ऐसे में सरकार का यह निर्णय एकपक्षीय है। पान मसाला से जुड़ी एक कंपनी के डीलर विजय मोदी ने कहा कि लाखों रुपये का पान-मसाला मंगवाया गया है। कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है।

कई परिवारों की छीनी जाएगी रोजी-रोटी
पान-मसाला पर प्रतिबंध लगने के बाद इससे जुड़े हजारों परिवारों की रोजी-रोटी भी छिनने की नौबत आ गई है। सौ से ज्यादा फेरीवाले दुकान-दुकान पान मसाला की आपूर्ति करते हैं। फेरीवाला रमेश और राजकुमार ने बताया कि वे दस सालों से यह काम कर रहे हैं। घर के पांच सदस्यों की जीविका चलती है। प्रतिबंध लगने से रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।

गुटखा को लेकर भी चलेगा अभियान
एसएसपी ने कहा है कि बिहार में गुटखे के कुछ उत्पादों पर भी बैन लगाया गया है। इस लेकर भी पुलिस विशेष अभियान चलाएगी। खासकर स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों के बाहर गुटखा बेचने पर पाबंदी की जाएगी।

सरकार का फैसला सराहनीय
पान-मसाला पर प्रतिबंध लगाना सरकारी की अच्छी पहल है। इसे प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत है। -रमण कर्ण, सामाजिक कार्यकर्ता

पान-मसाला से कैंसर और हृदय रोग संबंधित बीमारियां होती है। सरकार को पूरी कड़ाई कर इसकी बिक्री पर रोक लगानी चाहिए। -शैलेंद्र सर्राफ, पूर्व चैंबर अध्यक्ष

पहले भी प्रतिबंध लगाने की घोषणा हुई थी। पर, इस पर अमल नहीं किया जा सका। प्रशासन को पूरी कड़ाई के साथ बिक्री पर रोक लगानी चाहिए। -रामगोपाल पोद्दार, सामाजिक कार्यकर्ता

कम उम्र के बच्चे भी पान-मसाला के आदि हो गए हैं। युवाओं में यह फैशन हो गया है। सरकार का यह निर्णय काफी सराहनीय है। -अश्विनी जोशी मोंटी

Posted By: Dilip Shukla

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