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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 20, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

खुलासा: भागलपुर नगर निगम में हुआ 27 लाख से अधिक का घोटाला, फंसेंगे कई कर्मचारी

By Shivam BajpaiEdited By:
Published: Sat, 20 Nov 2021 10:12 AM (GMT+05:30)

भागलपुर नगर निगम में 27 लाख से अधिक का घोटाला। ट्रेड लाइसेंस जारी करने के बाद भी निगम में जमा ...और पढ़ें

भागलपुर नगर निगम: जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा।
भागलपुर नगर निगम: जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा।

जागरण संवाददाता, भागलपुर : भागलपुर नगर निगम में ट्रेड लाइसेंस मामले में 27 लाख से अधिक का घोटाला हुआ है। इस मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय टीम ने जांच पूरी कर ली है। रिपोर्ट तैयार कर लिया गया है। अब किसी भी वक्त रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। जांच कमेटी में अपर समाहर्ता राजेश झा राजा, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी श्वेता कुमारी व वरीय उप समाहर्ता शैलेंद्र कुमार सिंह हैं।

2016-17 से 20-21 तक नगर निगम ने 5902 ट्रेड लाइसेंस जारी किए। इनमें से 943 ट्रेड लाइसेंस के मामले में एक भी राशि जमा नहीं हुई। 4939 ट्रेड लाइसेंस के मामले में आधी-अधूरी राशि जमा की गई। 5902 ट्रेड लाइसेंस के लिए 98 लाख 92 हजार 250 रुपये जमा होने थे, लेकिन 27 लाख से अधिक राशि जमा नहीं हुई। ट्रेड लाइसेंस से संबंधित रजिस्टर व आनलाइन में भारी अंतर है।

जांच के दौरान पता चल रहा है कि रजिस्टर में जो राशि अंकित है, वह कंप्यूटर पर नहीं है। रजिस्टर पर कम राशि दर्शायी गई है। रजिस्टर में कम संख्या में नाम हैं और कंप्यूटर में अधिक है।

एक महीने तक चली जांच

प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश पर जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने नगर निगम द्वारा जारी ट्रेड लाइसेंस की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। सीनियर डिप्टी कलेक्टर शैलेंद्र कुमार सिंह ने नगर निगम से 2017 से अब तक के ट्रेड लाइसेंस से संबंधित रजिस्टर की मांग की थी। नगर निगम के ट्रेड लाइसेंस शाखा प्रभारी निरंजन मिश्रा और कंप्यूटर आपरेटर ज्ञानेन्द्र कुमार वर्मा ने सारे रजिस्टर जांच के लिए उपलब्ध कराते हुए जांच में महीनेभर सहयोग किया था।

आठ सफाई कर्मियों की नहीं दी जानकारी

आठ सफाई कर्मियों के मामले में नगर निगम ने जांच कमेटी को रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराया। जांच टीम ने दो बार लिखित और दो बार मौखिक रूप से नगर आयुक्त से जानकारी मांगी थी। टीम ने नगर निगम जाकर भी रिपोर्ट की मांग की थी।

पूछा गया था कि इन कर्मियों की नियुक्ति किसके आदेश पर हुई है। कब इनकी नियुक्ति हुई। उक्त कर्मी कहां प्रतिनियुक्त थे। क्या निजी कार्य के लिए डेपुटेशन पर थे। निजी कार्य में कितने कर्मियों को लगाया गया था। वर्तमान में ये कहां कार्यरत हैं। उन्हें कब से कब तक का मानदेय दिया गया है। किसके आदेश पर इनकी प्रतिनियुक्ति की गई थी। पूरी जानकारी नगर आयुक्त से मांगी गई थी, लेकिन नगर निगम ने रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराया।

राशि गबन करने का खेल

नगर निगम में 2017 से फर्जी ट्रेड लाइसेंस जारी कर राशि गबन करने का खेल चल रहा था। वर्तमान शाखा प्रभारी निरंजन मिश्रा के द्वारा फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद निगम में खलबली मच गई। निगम प्रशासन ने इस मामले में आंतरिक जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान पूर्व शाखा प्रभारी दिव्या स्मृति से पूछताछ की गई। उनके हस्ताक्षर के नमूने को भी लिये गए। लेकिन दिव्या जारी लाइसेंस पर अपने हस्ताक्षर से इंकार करती रही।

बावजूद शक की सूई उस पर ही घूमती रही। निगम ने शक पर दिव्या को निलंबित कर दिया। कंप्यूटर आपरेटर गौतम कुमार साह को कार्यमुक्त कर दिया गया। उसकी संलिप्तता उजागर हुई थी। निगम की आंतरिक जांच को लेकर निगम पार्षद संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद जिलाधिकारी और आयुक्त से मुलाकात करके जांच कराने की बात कही। जिला प्रशासन ने एडीएम राजेश झा राजा के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित कर दी।