कटिहार [मनीष सिंह]। कारगिल युद्ध् में पाक सैनिकों को धूल चटाने वाले सेवानिवृत फौजी अतुल चंद्र कर्मकार फिलहाल खेल मैदान के रण बांकुरें तैयार कर कर रहे हैं। सेवानिवृति के बाद से लगातार गंगा व महानंदा से घिरे इस क्षेत्र में खेल विकास को लेकर उनकी मुहिम चल रही है। स्वस्थ्य समाज की परिकल्पना के साथ वे विशेषकर युवाओं को फुटबाल खेल से जोडऩे का लगातार प्रयास करते हैं। उनके इस प्रयास से इस क्षेत्र में न केवल फुटबाल का क्रेज बढ़ा है, बल्कि इस माध्यम से कई खिलाड़ी राज्य स्तर तक पहुंच चुके हैं। इतना ही नहीं उनके इस मुहिम से जुड़े कई युवाओं का कैरियर भी संवर चुका है और वे फिलहाल पुलिस व सैन्य विभाग में नौकरी कर रहे हैं।

अमदाबाद प्रखंड के गोपालपुर गांव निवासी अतुल चंद्र कर्मकार लंबे समय तक देश की सेवा की है। 1999 के कारगिल युद्ध में भाग लेने के बाद वे सेवानिवृत हुए हैं। सेवाकाल के दौरान जालंधर, अंबाला, जम्मू कश्मीर, तिनसुकिया, नागालैंड सहित देश के कई जगह में तैनात होकर देश की सेवा की है। शांति सेना के रूप में लंबे समय तक वे श्रीलंका में भी रह चुके हैं। मालदीव में भी उन्होंने भारतीय सेना के तरफ से सेवा दी है। वर्ष 1999 में सेवानिवृत होने के बाद रिटायर्ड फौजी अतुल चंद्र कर्मकार समाज के युवाओं को नशापान आदि से दूर रखते हुए उन्हें स्वस्थ्य बनाने का बीड़ा का उठाया। प्रखंड मुख्यालय स्थित इंद्रावती उच्च विद्यालय के खेल मैदान में उन्होंने युवाओं को फुटबॉल के गुर सिखााना शुरु किया। शुरुआत में इससे कम युवाओं का जुड़ाव था और बाद में इसकी कतार लंबी होती चली गई।

आज यह कारवां काफी बड़ा हो चुका है। श्री कर्मकार ने कहा कि रिटायर होने के यहां के युवाओं को फुटबॉल खेल के प्रति रुझान बढ़ाने को लेकर इंद्रावती उच्च विद्यालय के खेल मैदान में युवाओं को फुटबॉल सिखाने लगे एवं लंबे समय तक यहां के युवाओं को अपने नेतृत्व में फुटबॉल खेलना सिखाया। उनके द्वारा प्रशिक्षित फुटबॉल टीम बिहार एवं बंगाल में भी कई स्थानों पर फुटबॉल टूर्नामेंट में शामिल हो चुकी है। उनके प्रयास से तैयार बबलू कुमार दत्ता, हेमंत कुमार मंडल आदि ने बताया कि रिटायर्ड फौजी श्री कर्मकार चार बजे सुबह में ही साइकिल से उनके घर पर पहुंच जाते थे एवं सुबह में ही जगा कर खेल मैदान में लेकर चले जाते थे। वे नि:शुल्क फुटबॉल खेलना सिखाते थे।श्री कर्मकार का कहना है कि अगर समाज स्वस्थ्य रहेगा तो देश स्वस्थ् होगा। इसी मंत्र के तहत वे इस मुहिम को शुरु किया है। उन्हें खुशी है कि युवाओं ने उनकी मुहिम का बखूबी सम्मान किया और आज युवाओं में एक नया हौसला पल रहा है।

 

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