भागलपुर [जेएनएन]। तिलकमांझी भागलपुर विश्‍वविद्यालय हमेशा किसी न किसी विषय को लेकर सुर्खियों में रहा है। इस बार इस विवि के आईआरपीएम विभाग की कार्यशैली इन दिनों चर्चा में है। आईआरपीएम विभाग के विभागाध्यक्ष पर यहां के कई छात्रों ने मनमानी करने, छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करने, छात्रों को विभाग से भगा देने सहित अन्य कई आरोप लगाए हैं। ताजा प्रकरण यह है कि इस विभाग के एक दिव्यांग छात्र ने जब रिसर्च मेथेडोलॉजी कोर्स का सर्टिफिकेट मांगा तो विभागाध्यक्ष ने कहा कि 'हम सर्टिफ‍िकेट तो देंगे, लेकिन उसमें तारीख नहीं डालेंगे।' छात्र के अनुसार ऐसे सर्टिफ‍िकेट से क्या फायदा, जब उसके आधार पर पीएचडी में नामांकन ही नहीं हो सकता।

रिसर्च मेथेडोलॉजी कोर्स का नहीं मिला सर्टिफ‍िकेट
पीएचडी में दाखिला के लिए एक दिव्यांग छात्र को रिसर्च मेथेडोलॉजी कोर्स का सर्टिफिकेट नहीं मिलने से काफी परेशानी हो रही है। इशाकचक निवासी छात्र सरोज कुमार ने बताया कि उन्होंने जुलाई 2018 से दिसंबर 2018 तक के सत्र में रिसर्च मेथेडोलॉजी कोर्स में नामांकन लिया था। टीएमबीयू के आईआरपीएम विभाग में चार माह का रिसर्च मेथेडोलॉजी कोर्स पूरा किया। साथ ही कम्प्यूटर साइंस डिपार्टमेंट से दो माह का कम्प्यूटर कोर्स भी पूरा किया। दोनों कोर्स करने के बाद फरवरी 2019 तक सर्टिफिकेट निर्गत किए जाने थे। लेकिन, विभाग और विवि का बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद सर्टिफिकेट अब तक नहीं मिल सका है। सरोज कुमार ने बताया कि इस तरह की समस्या से विभाग के 14 छात्र परेशान हैं।

2011 में उत्तीर्ण की थी पीआरटी की परीक्षा
सरोज ने 2011 में पीआरटी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। तभी उन्हें पता चला कि अब पूर्व से किए हुए पीआरटी की वैद्यता मात्र एक वर्ष ही रहेगी। उन्होंने रिसर्च मेथेडोलॉजी कोर्स में जून 2018 में नामांकन लिया। नए नियम के अनुसार उनकी पीआरटी वैद्यता इस बार 2019 में होने वाले पीएचडी में नामांकन तक रहती।

फरवरी में ही मिलना था सर्टिफिकेट
20 अगस्त 2019 को जब छात्र सरोज अपने आईआरपीएम विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एसडी झा से मिला तो उन्होंने उनके साथ दुव्र्यवहार किया। सरोज ने घटना की जानकारी प्रतिकुलपति प्रो. रामयतन प्रसाद को दी। दबाव में आकर विभागाध्यक्ष डॉ. एसडी झा ने सर्टिफिकेट देने की बात तो कही, लेकिन उन्होंने कहा कि हम बिना तारीख वाला सर्टिफिकेट निर्गत करेंगे। अब सरोज को चिंता है कि बिना तारीख वाले सार्टिफिकेट से उनका नामांकन पीएचडी में कैसे होगा।

रिसर्च प्रपोजल भी जमा करवा लिया
एक बार विभागाध्यक्ष डॉ. एसडी झा ने सरोज से कहा कि पहले रिसर्च प्रपोजल जमा करो, उसके बाद ही सर्टिफिकेट मिलेगा। सरोज ने 20 मई 2019 को अपना रिसर्च प्रपोजल विभाग के सभी शिक्षकों के सामने जमा किया। शिक्षकों ने सरोज से ओरल टेस्ट भी लिए। इसके बाद भी उन्हें न तो रिसर्च मेथेडोलॉजी कोर्स का सर्टिफिकेट मिला और न ही प्री सबमिशन सेमिनार का डेट ही। सर्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण वे शोध पत्र जमा नहीं कर पा रहे हैं।

छात्र का हो चुका है प्री सबमिशन सेमिनार
विभागाध्यक्ष डॉ. एसडी झा को दबाव देने के बाद सरोज का सात अगस्त 2019 को प्री सबमिशन सेमिनार हुआ। सेमिनार के बाद डीआरसी ने सरोज के प्रपोजल को स्वीकृत किया। लेकिन सामाजिक विज्ञान के डीन प्रो. बीके शर्मा ने उस प्रप्रोजल को जमा लेने से इंकार कर दिया। प्रो. बीके शर्मा ने सरोज को कहा कि आपने निर्धारित समय में इसे जमा नहीं किया है।

विभागाध्यक्ष करते रहे टालमटोल
इससे पहले छात्र सरोज कुमार विभागाध्यक्ष डॉ एसडी झा से कई बार मिले। लेकिन, विभागाध्यक्ष समस्या हल करने की बजाय हर बार झूठा आश्वासन देते रहे। वे हमेशा कहते रहे कि मेरे रहते हुए चिंता मत करो, तुम्हारा रजिस्ट्रेशन और नामांकन पीएचडी में हो जाएगा। इसी आश्वासन के आधार पर सरोज ने आगे का शोध कार्य भी जारी रखा।

Posted By: Dilip Shukla

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