आनलाइन डेस्क, भागलपुर। Republic Day 2022: हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा, हमारे देश का अभिमान, गौरव और शान का प्रतीक है। हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को हमारे राष्ट्रीय ध्वज को फहराने का इंतजार बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को रहता है। आखिर दोनों राष्ट्रीय पर्व के उत्सव का आगाज ध्वज के शान से फहराने के बाद ही शुरू होता है। लेकिन दोनों दिवसों में ध्वज फहराने में बड़े अंतर हैं। चलिए जानते हैं...

15 अगस्त और 26 जनवरी 

15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर होने वाले समारोह में हमारा राष्ट्रीय ध्वज पोल से बांधा जाता है, जो रस्सी के सहारे ऊपर खींचा जाता है और फिर फहराया जाता है। इसे ध्वजारोहण कहा जाता है। स्वतंत्रता दिवस में ध्वजारोहण को अंग्रेजी में फ्लैग होस्टिंग (Flag Hoisting) कहते हैं। 

बात करें 26 जनवरी की, तो इस दिन हमारा तिरंगा पहले से ही पोल के शीर्ष पर बंधा रहता है। फिर डोर के सहारे इसे फहराया जाता है। इसे झंडा फहराना या झंडोत्तोलन कहते हैं। इस प्रक्रिया को अंग्रेजी में फ्लैग अनफर्लिंग (Flag Unfurling) कहा जाता है। हमने अंग्रेजी में दोनों दिवसों की बात को इसलिए भी बताया है, ताकि दोनों दिवसों के बड़े अंतर को बारीकी से समझाया जा सके।

गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर कुछ और रोचक जानकारियां

दिल्ली में 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री फ्लैग होस्ट करते हैं। जबकि 26 जनवरी को राष्ट्रपति। इसके पीछे का कारण ये है कि 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ, तो उस ऐतिहासिक क्षण के सम्मान के लिए ध्वजारोहण किया गया। क्योंकि उस समय भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते हैं, उन्होंने पदभार भी ग्रहण नहीं किया था। हालांकि, इस दिन के पूर्व संध्या को राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम अपना संदेश देते हैं। 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस को संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन राष्ट्रपति ही फ्लैग अनफर्लिंग करते हैं। 

यहां ये भी बता दें कि स्वतंत्रता दिवस के दिन दिल्ली के लाल किले पर पीएम ध्वजारोहण करते हैं , जबकि गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर झंडा फहराया जाता है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभर में धूमधाम से कार्यकर्म आयोजित होते हैं लेकिन गणतंत्र दिवस के मुकाबले स्वतंत्रता दिवस पर ऐसा नहीं होता है।

Edited By: Shivam Bajpai