पूर्णिया [प्रकाश वत्स]। बात महज पांच दशक पूर्व की है। शहर के पूर्वी भाग से गुजरने वाली सौरा नदी में उफान से पूर्णिया शहर को हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती थी। कई-कई दिनों तक शहर में पानी जमा रहता था। लगातार इस स्थिति के कारण सन 1971 में सौरा नदी के प्रकोप से शहर को बचाने के लिए नदी के पश्चिम तट पर लगभग पांच किलोमीटर की दूरी में तटबंध का निर्माण कराया गया। इसका पुराना नाम पामर बांध है। यद्यपि इसे लोग सौरा तटबंध के नाम से भी जानते हैं। अब यह तटबंध खुद महफूज नहीं है। शहर का सुरक्षा दीवार कहे जाने वाले इस तटबंध की वर्तमान हालत भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत है। शहर एक बार फिर पांच दशक पूर्व होने वाली तबाही की दहलीज की ओर सरक रहा है।

बाघमारा से वाया सिटी, लाइन बाजार होते हुए बायपास में मिलता है बांध

पामर बांध अथवा सौरा तटबंध पूरी तरह बाढ़ से शहर को बचाने की मकसद से बना था। शहर श्रीनगर रोड स्थित बाघमारा से बायपास तक वाया पूर्णिया सिटी, लाइन बाजार इस तटबंध का निर्माण का कराया गया था। इसे शहर का सुरक्षा कवच माना गया था। इस तटबंध के निर्माण के बाद मुख्य शहर बाढ़ से पूरी तरह महफूज हो गया था। अब भी सौरा में उफान आने पर यही तटबंध शहर को बाढ़ की तबाही से बचाता है।

1987 में टूटा था तटबंध, मची थी तबाही

सन 1987 में यह तटबंध लाइन बाजार, कप्तान पुल के समीप टूट गया था। इस चलते महज दो घंटे के अंदर ही शहर का अधिकांश हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया था। बाद में वहां ङ्क्षरग बांध का निर्माण कराया गया था। वर्ष 2008 में भी तटबंध लगभग टूटने के कगार पर पहुंच गया था। बाद में विभागीय व प्रशासनिक तत्परता से बांध को बचाया जा सका था। सन 2017 व 2020 में यह स्थिति पैदा हो गई थी और शहर वासियों की बेचैनी बढ़ गई थी।

अतिक्रमण व अवैध रास्ते के कारण तटबंध को पहुंच रहा नुकसान

शहर का यह सुरक्षा दीवार अब पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह गया है। प्रशासनिक व विभागीय उदासीनता से तटबंध अतिक्रमण की जद में आ रहा है। बाघमारा से बायपास तक कई जगह तटबंध से सटे मकान बन चुके हैं। कई जगह नदी से अवैध बालू व मिट्टी खनन के लिए वाहन मालिकों ने तटबंध को क्षतिग्रस्त करते हुए अवैध रास्ता बना लिया है। इससे जगह-जगह तटबंध कमजोर हो गया है। इसके अलावा रेन कट से ही कई जगह धसान हो चुका है। यद्यपि दो साल पूर्व आम लोगों द्वारा लगातार आवाज उठाने के बाद तटबंध पर सड़क निर्माण की स्वीकृति मिली थी। कुछ कार्य भी हुआ है। गिट्टी तक बिछ चुकी है, लेकिन पीङ्क्षचग का कार्य अटका हुआ है।

 

Edited By: Abhishek Kumar