जागरण संवाददाता, पूर्णिया। इसे जन भावनाओं के साथ खिलवाड़ कहें या फिर आगामी चुनाव को लेकर खेला गया खेल। नगर निगम में कुल 87 ऐसी योजनाओं की भी निविदा निकाल दी गई, जिसके लिए निगम में राशि ही उपलब्ध नहीं था। निगम बोर्ड की स्वीकृति के बाद पूर्व नगर आयुक्त के स्तर से यह पूरा खेल खेला गया है। इधर राशि उपलब्ध नहीं रहने के कारण अब इन योजनाओं को रद करने की नौबत आ गई है।

- बोर्ड की स्वीकृति के बाद निविदा के लिए भेजा गया था प्रस्ताव

- फंड उपलब्ध नहीं होने पर रद हो सकती है संबंधित योजनाओं की निविदा

योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए चाहिए 15 करोड़

बिना फंड की जिन 87 योजनाओं की निविदा निकाली गई है, उसमें अधिकांश योजनाएं सड़क व नाला निर्माण से संबंधित है। निगम क्षेत्र के प्राय: हर वार्ड से ये योजनाएं संबंधित है। अब फंड के अभाव में ये सारी योजनाएं अटक चुकी है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए लगभग 15 करोड़ की राशि की जरुरत है, जो फिलहाल निगम के पास उपलब्ध नहीं है। कहीं न कहीं निवर्तमान प्रतिनिधियों व पूर्व के अधिकारियों द्वारा हर स्थिति से अवगत होते हुए यह पूरी प्रक्रिया की गई है।

उम्मीद की बची है एक किरण, मगर उसमें भी फंसा है पेंच

फंड की ताजा संभावना में निबंधन विभाग से निगम को मिलने वाली अंश राशि गत दो साल से नहीं मिली है।इस मद से तकरीबन 12 करोड़ की राशि निगम को मिलने की संभावना है। इसको लेकर प्रक्रिया जारी है। इस स्थिति में अगर उक्त 12 करोड़ की राशि निगम को प्राप्त होती है और उक्त राशि को अगर इस योजना मद में देने की सहमति होती है, तभी इनमें अधिकतम योजनाओं का क्रियान्वयन संभव हो सकता है। अगर उक्त राशि शहरी विकास को लेकर किसी अन्य कार्य पर व्यय होता है, तो फिर सारी निविदा को रद करना ही एक मात्र विकल्प होगा।

तकनीकी कारणों से रद हो चुकी है 12 करोड़ की योजनाएं

नगर निगम की 12 करोड़ की योजनाएं की निविदा पूर्व में भी तकनीकी कारणों से रद की जा चुकी है। इसमें कई ऐसी योजनाएं भी शामिल थी, जिसकी निविदा किसी ने भरी ही नहीं। कुछ निविदा आवश्यक कागजात नहीं रहने तो कई अन्य तकनीकी त्रुटि के कारण रद कर दी गई। इसमें भी अधिकांश योजनाएं सड़क व नाला निर्माण से ही संबंधित है।

पूर्व में नगर निगम बोर्ड की स्वीकृति से कुल 87 ऐसी योजनाओं की निविदा निकाल दी गई है, जिसके लिए निगम में फिलहाल फंड ही उपलब्ध नहीं है। अगर निकट भविष्य में किसी मद की राशि उपलब्ध होती है तभी इसका क्रियान्वयन संभव होगा, वरना निविदा रद करने की कार्रवाई किया जाना ही एकमात्र विकल्प होगा। -जिउत सिंह, नगर आयुक्त, पूर्णिया।  

Edited By: Abhishek Kumar