पूर्णिया [दीपक शरण]। स्वास्थ्य विभाग लाइसेंस धारी लैब व अल्ट्रासाउंड सेंटर को सूचीबद्ध करने से आगे अबतक नहीं बढ़ पाया है। विभाग के पास शायद ही इसका जवाब मिले कि आखिर किसके अनुमति से गैर लाइसेंस धारी लैब अब भी संचालित हो रहे हैं। विभाग 116 को मान्यता देता है लेकिन सच्चाई यह है कि 300 अधिक लैब और सेंटर मजे से चल रहे हैं। विभाग सलेक्टिव एप्रोच और कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करता दिखता तो जरूर है लेकिन होता कुछ नहीं है। टीम गठन और चिह्नित करने से स्वास्थ्य विभाग आगे नहीं बढ़ पाता है। स्वास्थ्य विभाग नकेल कसने में नाकाम साबित हो रहा है। आखिर जब जिले में मानक के अनुरूप संचालित लैब की सूची तैयार कर लैब स्वास्थ्य विभाग सार्वजनिक जगहों पर चस्पा कर दी है। लाइसेंस धारी लैब की पहचान से विभाग कब आगे बढ़ेगा। लैब संचालक के आगे विभाग बौना साबित हो रहा है। विभाग ऐसे लैब पर नियमित कार्रवाई नहीं कर पाता है।

क्लीनिक व नर्सिंग होम के अंदर लैब संचालन पर विभाग मौन -:

क्लीनिक और नर्सिंग होम के अंदर संचालित हो रहे हैं ऐसे लैब पर विभाग मौन क्यों है। मजेदार बात यह है ऐसे की नियमित जांच भी नहीं की जाती है। विभाग फिर किस आधार पर सलेक्टिव कार्रवाई कर शांत बैठ सकता है। इसी तरह अवैध तरीके से संचालित लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटर पर विभाग मौन है।

जिले में 116 बैध लैब व अल्ट्रासाउंड सेंटर -:

जिले में लैब पर ऐसी सूची तैयार की गई लाइसेंसधारी हैं। वैसे 116 लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटर जिले में जिसको विभाग मान्यता देता है और निबंधक की प्रक्रिया पूरी कर लाइसेंस हासिल कर सेंटर चला रहा है। उसके बाद से क्या फिर नए लैब को लाइसेंस निर्गत नहीं किया गया तो फिर उसकी सूची कहां है। चिह्नित लैब डंके के चोट पर संचालित हो रहे हैं। ऐसे लैब जिसने क्लिनिकल एसटेबलिशमेंट ( रेगुलेशन एंड रेगुलेशन एक्ट 2010 के प्रावधानों के अंतर्गत) निबंधन कराया था। उसकी संख्या विभाग के मुताबिक 116 है। गैरकानूनी लैब को मकान किराये देने वाले पर भी कार्रवाई की बात विभाग करता है लेकिन अबतक उस नकेल कसने में विभाग नाकाम रहा है।

लैब की मनमानी पर नहीं लगता लगाम

पैथोलोजी लैब को संचालित करने के लिए एमडी पैथोलोजिस्ट की योग्यता अनिवार्य है। अदालत के आदेश के मुताबिक अगर जांच रिपोर्ट में पीजी पैथोलोजिस्ट का हस्ताक्षर नहीं है तो जांच रिपोर्ट गलत है। विभाग से प्रशिक्षण प्राप्त एमबीबीएस भी सीमित लैब टेस्ट कर सकता हैं। लेकिन लैब सीमित जांच की मान्यता लेकर एडवांस टेस्ट भी कर रहा है।

कहीं भी नियमों का नहीं होता है पालन -

शहर में एमडी चिकित्सकों की संख्या सीमित है। इसकी संख्या महज 20 होगी। अधिकांश सेंटर एमडी चिकित्सक के बिना ही चल रही है। लैब संचालक सेटेलाइट कनेक्शन सेंटर भी चला रहे हैं। यहां टेस्ट के लिए सैंपल कलेक्शन होता है। लैब पर जहां 30 या उससे अधिक सैंपल कलेक्शन हो रहे हैं वहां एमबीबीएस चिकित्सक होने चाहिए। इस नियम का लैब शायद ही पालन करते हैं। यही हाल अल्ट्रा साउंड सेंटर का भी है जिसको लिए रेडियोलोजिस्ट की डिग्री अनिवार्य है लेकिन सच्चाई क्या है सभी जानते हैं। पचास तो अल्ट्रासाउंड को विभाग मान्यता देता तो फिर रेडियोलोजिस्ट की संख्या महज 12 ही है। लैब की तरह इसकी भी कहानी है। विभाग हमेशा ही जांच के नाम खानापूर्ति करती है और एप्रोच सलेक्टिव रहता है।

लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की नियमित जांच होती है। कलेक्शन सेंटर भी खेल रखा है और क्लिनिक और नर्सिंगहोम के अंदर संचालित लैब की भी जांच होगी। वैसे लैब पर कार्रवाई होगी। -डा. एसके वर्मा, सिविल सर्जन

 

Edited By: Abhishek Kumar