जागरण संवाददाता,पूर्णिया। कोरोना संक्रमित मरीजों को बेहतर सुविधायुक्त उपचार का दावा तो सरकारी स्तर पर किया जाता है लेकिन धरातल पर वह दिखता नहीं है। निजी अस्पताल में बेड की किल्लत रहती है वहीं सदर अस्पताल समेत सरकारी अस्पतालों में बेड खाली है। छह हजार से अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों में एक भी गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा सदर अस्पताल में नहीं मिली है। दूसरी लहर में अबतक 18 मरीजों की मौत कोरोना संक्रमण से हो चुकी है।

गंभीर मरीजों को कर दिया जाता है रेफर

सदर अस्पताल में पांच वेंटिलेटर उपलब्ध है। मरीजों को अबतक इसका लाभ नहीं मिला है। पिछले वर्ष 2020 में ही पांच वेंटिलेटर को क्रियाशील करने का दावा किया गया था। मरीज यहां से उच्च मेडिकल संस्थान को रेफर होते रहे लेकिन किसी को यह सुविधा नहीं मिली। पहली लहर में कोरोना संक्रमण से चालीस से अधिक लोगों को मौत हो गई थी।

टेक्नीशियन का अभाव

सदर अस्पताल में पांच वेंटिलेटर इसलिए क्रियाशील नहीं हो पा रहे थे कि उसके संचालन के लिए समुचित प्रशिक्षण प्राप्त टेक्नीशियन का अभाव है। यह मामला जब जिलाधिकारी राहुल कुमार के संज्ञान में आया तो इस संबंध में सिविल सर्जन को वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया। उसके बाद सिविल सर्जन डॉ. एसके वर्मा ने वैकल्पिक व्यवस्था कर इसको क्रियाशील करने का दावा कर रहे है।

इस कार्य के लिए समुचित प्रशिक्षण प्राप्त टेक्नीशियन की प्रतिनियुक्त की गई है। सीएस ने बताया कि जिन मरीजों को वेंटिलेटर पर रखने की आवश्यकता होगी उसको मिलेगी। उन्होंने बताया कि उपलब्ध संसाधन में ही कोविड मरीज और सामान्य मरीजों को बेहतर सुविधा मुहैय्या कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि कोविड वार्ड में भर्ती सभी मरीजों की स्थिति सामान्य है।

सदर अस्पताल में पांच वेंटिलेटर क्रियाशील है। गंभीर मरीज को अगर इसकी आवश्यकता होगी तो यह सुविधा मिलेगी। तकनीशियन के अभाव में यह संचालित नहीं किया जा रहा था लेकिन अब वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गई है। - डॉ. एसके वर्मा, सिविल सर्जन

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