भागलपुर। मशाकचक में रविवार को मेगा कलस्टर से जुड़े बांका और भागलपुर के 10 कलस्टर के बुनकरों ने बुनकर हाट में रेशमी वस्त्रों का स्टॉल लगाया। हैंडलूम पर तैयार किए गए सिल्क और लीलन के ड्रेस मटेरियल लोगों को खूब पसंद आया।

हूनरमंद बुनकरों द्वारा तैयार एक से बढ़कर एक उत्पाद को देख लोगों ने सराहना की। सिल्क साड़ी, स्कार्प, ड्रेस मेटेरियल, कॉटन, लीलन, सलवार सूट और कॉटन खादी के स्टॉल पर खरीदारी के लिए काफी भीड़ रही।

देर शाम तक हाट में करीब ढाई हजार लोग पहुंचे। शहर की अनिता, सुनिता और श्वेता ने बताया कि बाजार की तुलना में बुनकर हाट में रेशम के वस्त्रों की कीमत किफायत है। बाजार में साड़ी कीमत चार जार रुपये है वहीं हाट में ढाई हजार तक में मिला।

हाट में बांका जिले के धौरेया, बौंसी व अमरपुर तथा भागलपुर के जगदीशपुर, गोराडीह, शाहकुंड, नाथनगर, खरीक व पीरपैंती कलस्टर का स्टाल लगाया गया। दो जिलों के कलस्टर में उत्पादित रेशमी वस्त्रों की खरीदारी का अवसर शहरवासी को दी गई है।

कलस्टर के जुड़े बुनकर इलियास अंसारी, मुस्तफापुर के खुर्शीद अंसारी, शेखपुरा के सोहराव, पुरैनी के अफजल आलम, वली अहमद ने बताया कि साप्ताहिक बुनकर हाट की योजना से बुनकरों को बाजार मिला है। उत्पादित कपड़ों को सीधे खरीददार तक पहुंचाने में हाट की बड़ी भूमिका अदा की है।

इसकी कमी से हैंडलूम बुनकर आए दिन महाजनों के चुंगल से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। महाजन और बिचौलिए द्वारा उपलब्ध कराए गए धागे को मजदूरी पर तैयार करने को विवश थे। 20 से 30 रुपये प्रति मीटर मजदूरी पर कपड़ा तैयार करना पड़ता था।

राव मटेरियल के लिए बैंक से मुद्रा योजना के तहत ऋण मिलने से स्वरोजगार की दिशा में बढ़ावा मिला है। ऋण योजना से जोड़ने के बाद हैंडलूम से जुड़े हुनरमंद बुनकरों को मुख्य धारा में लाया जा सकता है। इससे बुनकर की गाढ़ी कमाई को बिचौलिया से बचाया जा सकता है। हाट की व्यवस्था से बिचौलिए का हस्तक्षेप खत्म होगा।

मेगा कलस्टर के नोडल अधिकारी प्रभाष चंद्र सिंह ने बताया कि कलस्टरों में बुनकरों द्वारा तैयार किए गए कपड़ों को प्रदर्शन के साथ बिक्री के लिए स्टाल लगाए गए है। जिसे कलस्टर के माध्यम से हाट में लगा जाता है। इससे 10 कलस्टर से जुड़े 2500 बुनकर का बाजार की समस्या दूर हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि पुरैनी कलस्टर के जुड़े 29 बुनकरों को 50-50 हजार रुपये का मुद्रा योजना का लाभ मिला है। इससे धागा और राव मेटेरियल की खरीदारी में आर्थिक संकट का निदान हुआ है। तैयार कपड़ों को हाट में बेचने के बाद आमदनी के साथ धागा खरीदारी में आर्थिक बाधा दूर हुई है।

Posted By: Jagran

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