जागरण संवाददाता, पूर्णिया। जन अधिकार छात्र परिषद द्वारा शनिवार को आठ सूत्री मांगों के समर्थन सहित स्नातक स्तरीय नामांकन में व्याप्त धांधली के विरोध में पूर्णिया विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर प्रदर्शन किया। इस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई और विवि प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा गया। आंदोलन की अगुवाई पूर्णिया कालेज छात्र संघ अध्यक्ष करण यादव ने किया।

उन्होंने कहा कि जिन विभिन्न मांगों को लेकर संगठन द्वारा तालाबंदी की गई है उसमें सबसे अहम सत्र 2021-24 स्नातक नामांकन में बरती गई धांधली है। ज्यादा अंक पाने वाले छात्र एवं छात्राएं का लिस्ट में नाम नही है जबकि कम अंक वाले छात्र-छात्राओं का नामांकन लिया जा रहा है। इस तरह के कई उदाहरण मौजूद हैं। इसी तरह विश्वविद्यालय द्वारा एससी-एसटी एवं छात्राओं का नामांकन शुल्क वापस करने के लिए फार्म तो भराया गया लेकिन अभी तक शुल्क वापस नही किया गया है।

संगठन तत्काल फीस वापस करने की मांग करती है। पूर्णिया कालेज और महिला कालेज में बीएड की पढ़ाई शुरू कराने की मांग भी संगठन द्वारा की गई। सभी कालेजों मे शिक्षक की कमी दूर करने, सभी महाविद्यालय में वर्ग का संचालन सुचारू रूप से कराने, सभी सरकारी कालेजों में छात्रावास की समुचित व्यवस्था करने, पूर्णिया कालेज में एक करोड़ 10 लाख के वित्तीय गड़बड़ी का जांच कराकर उसे सार्वजनिक करने व परीक्षा सत्र को नियमित करने की मांग की गई।

विश्वविद्यालय अध्यक्ष विनय यादव ने कहा कि तीन वर्षों से विश्वविद्यालय छात्र छात्राओं के साथ सौतेला व्यवहार कर रही हैं। हर साल हजारों छात्र नामांकन से वंचित रह जाते हैं। पूर्णिया कालेज इकाई के संयुक्त सचिव अभिषेक आनंद ने कहा कि जब से यह विश्वविद्यालय बना है, यहां पठन-पाठन का माहौल चौपट हो गया है। विश्वविद्यालय प्रतिनिधि राहुल यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की मिलीभगत से हर साल यहां नामांकन में धांधली किया जाता है। यहां के आइटी सेल पर बार बार सवाल उठ रहा है।

इस मुद्दे पर भी प्रशासन पूरी तरह मौन है। इस मौके पर छात्र जिलाध्यक्ष सुमित यादव, तनवीर अहमद, विशाल कुमार, रवि झा, अभिषेक यादव, सेयूब आलम, आदिल आर•ाू, आशीष यादव, ङ्क्षप्रस कुमार, रवि यादव, सोनू शेख, एसके जावेद, अंबष्ट कुमार, अरशद आलम, कौशल यादव, शंकर कुमार, प्रियांशु दास, अमन कुमार, अभिजीत कुमार सहित काफी संख्या में छात्र मौजूद थे।

 

Edited By: Abhishek Kumar