मुंगेर । राज्य सरकार द्वारा बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का असर दिखने लगा है। बरियारपुर प्रखंड के अनुसूचित जाति बहुल्य गांव की एक बिटिया ने बाल विवाह के खिलाफ खड़े होने का साहस दिखाया। बहादुर बिटिया ने अभिभावकों द्वारा मर्जी के बिना कम उम्र में किए जा रहे शादी का विरोध किया। कस्तूरबा विद्यालय की छात्रा ने बात बनते नहीं देख अपने वार्डन को सूचना दी और मदद करने की गुहार लगाई। वार्डन ने बीडीओ को सूचना दी। इसके बाद बीडीओ और थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ लड़की के घर पहुंचे और शादी को रोक दिया। बाल विवाह के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाने वाली बहादुर बिटिया ने न सिर्फ अपनी शादी रोक कर अपना जीवन बर्बाद होने से बचा लिया। बल्कि अन्य लड़कियों को भी बाल विवाह के खिलाफ खड़ा होने की सीख दे दी। करहिरया पूर्वी पंचायत की बबिता कुमारी (काल्पनिक नाम) कस्तूरबा विद्यालय में पढ़ती है। बीते मंगलवार को बबिता के माता पिता विद्यालय आए तथा वार्डन को अपने घर में बड़ी पुत्री की शादी होने की बात कह कर उसे घर ले गए। 25 अप्रैल को बबिता को पता चला कि उसकी शादी भी अभयपुर थाना क्षेत्र के शिवनगर निवासी झुंझु सदा के बेटे से तय हो गई है, तथा 26 अप्रैल को एक ही मंडप में दोनों बहन की शादी होगी। इसके बाद बबिता ने अपने वार्डन उर्मिला कुमारी को फोन कर इसकी जानकारी दी तथा अभी शादी नहीं करने की बात कहते हुए शादी से बचाने की अपील की। इसकी सूचना विद्यालय के अन्य बच्चों को भी हो गई तथा बच्चियों ने वार्डन से कहा कि मैडम सिर्फ बाल विवाह ही करने का नार लगवाते हैं बाल विवाह रोक नहीं सकते हैं। अगर बबिता की शादी हो जाती है, तो नारे का क्या मतलब रह जाएगा । इसके पूर्व ही वार्डन ने इसकी सूचना पटना के हेल्पलाईन को देने के साथ ही जिले के पदाधिकारियों को दी । जिसके बाद बीडीओ राजेश कुमार, थानाध्यक्ष राज रतन, सीडीपीओ पुष्पा कुमारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कृष्णनंदन शर्मा वार्डन उर्मिला कुमारी आदि पुलिस बल के साथ बबिता के घर पहुंचे तथा मामले की छानबीन की। तथा शादी में आए लड़की के मामा को बाल विवाह नहीं करने तथा इसके लिए होने वाली सजा के बारे में बताया। जिसके बाद मामा तथा गांव वालों ने कहा कि उनको यह जानकारी नहीं थी कि 18 वर्ष से कम उम्र में शादी नहीं करनी चाहिए । वे लोग अज्ञानता में यह काम कर रहे हैं, तथा लिखित आवेदन भी ऐसा नहीं करने का वचन दिया। इसके बाद बबिता को कस्तूरबा आवासीय विद्यालय वार्डन तथा पदाधिकारियों के साथ भेज दिया । जबकि लड़की के माता पिता सामान लाने के लिए बाजार गए हुए थे।

Posted By: Jagran