भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र] । मुकदमों में बरी होने वाले आरोपितों की बढ़ती संख्या को डीएम ने गंभीरता से लिया है। अब न्यायालय में मुकदमों में होने वाले फैसले में इंगेज किए गए अपर लोक अभियोजकों को रिहाई वाले केस का थाना कांड संख्या। किस कोर्ट में हुई सुनवाई। किस तिथि को हुई रिहाई। आरोपितों की संख्या का ब्यौरा देना अनिवार्य कर दिया गया है।

अब उन्हें हर माह इस बात का विधिवत ब्यौरा देना होगा कि उन्हें दिए गए किन-किन मुकदमों में आरोपित रिहा हुए हैं। यह भी जानकारी देनी होगी कि उन आरोपितों के रिहा होने की वजह क्या रही। अपर लोक अभियोजकों को इसका ब्यौरा पूर्व में भी मांगा जाता रहा है। लेकिन ब्यौरा देने का आंकड़ा अपर लोक अभियोजकों की संख्या के अनुपात में कम पाया गया। सरकार स्तर पर इस बात को लेकर मंथन हुआ कि रिहाई की संख्या बढ़ी है। बीते 27 अगस्त को भागलपुर डीएम ने लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजकों के साथ बैठक में इस पर गंभीरता से सवाल भी उठाए थे। लोक अभियोजक से इस संबंध में सवाल भी किया था। उक्त सवाल-जवाब में डीएम ने साफ कर दिया कि जो अपर लोक अभियोजक रिहाई की वजह और किन-किन मुकदमों में आरोपितों की रिहाई हुई है? इसका ब्यौरा नहीं दिए तो उनकी बिल रोक ली जाएगी। अब ताजा आदेश बाद प्रत्येक माह रिहाई संबंधी विधिवत ब्यौरा जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। यानि अब अपर लोक अभियोजकों को हर महीने उन रिहाई वाले मुकदमों का विस्तृत ब्यौरा पीपी को सौंपना होगा। पीपी उक्त सूची को जिला प्रशासन को देंगे। रिहाई और सजा का आंकड़ा जुटाने की कवायद पूर्व से जिला स्तर पर पुलिस विंग के अभियोजन कोषांग की ओर से भी कराया जा रहा है ताकि गवाहों को समय पर न्यायालय में उपस्थित कराते हुए गवाही की प्रक्रिया कराई जा सके।

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