भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र]। सूबे की जेलों में बंद महिला कैदियों में बढ़ रहे अवसाद को दूर भगाने के लिए कारा मुख्यालय ने जतन शुरू कर दिया है। जल्द ही सूबे की जेलों में महिला बंदियों के लिए मेडिकल प्रोटेक्शन ग्रुप (एमपीजी) काम करने लगेगा। यह ग्रुप रोज महिला बंदियों की दिनचर्या की निगरानी और स्वास्थ्य जांच कर मानसिक स्थिति का आकलन करेगा।

सर्वे के मुताबिक यह बात सामने आई है कि जेल में बंद अधिकतर महिलाएं हादसे और परिस्थितियों का शिकार हो अपराध को अंजाम देती हैं। जेल में आने के बाद परिवार से दूर होने का गम और बच्चों की चिंता उन्हें सताती है। धीरे-धीरे वे अवसाद का शिकार हो जाती हैं। जेल चिकित्सकों और जेल अधिकारियों के मुताबिक जेल में प्रवेश करने के कुछ दिनों बाद तक ऐसी महिला बंदी काफी तनाव में रहती हैं। अधेड़ महिला बंदी तो मेनोपॉज के कारण भी अवसाद में चली जाती है। जबकि युवा महिलाओं को जेल में तमाम तरह की दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। उसके रोज की पारंपरिक घरेलू शृंगार, बिस्तर, स्नान आदि की सुविधाएं घर जैसी नहीं हुआ करती है। उसके सामने अचानक ऐसे हालात आते हैं जो उसे ज्यादा तनाव में ला देते हैं। कारा मुख्यालय सर्वे के बाद इसको लेकर मंथन किया है कि अवसाद की शिकार महिला बंदियों को केवल दवा से नहीं ठीक किया जा सकता। बल्कि काउंसिलिंग की जरूरत है। महिला काउंसिलरों की तैनाती कर इस दिशा में बड़ा सुधार करने की योजना है। मेडिकल प्रोटेक्शन ग्रुप इसी कवायद को मूर्त रूप देने को बनाया जा रहा है। ग्रुप में शामिल काउंसिलर महिला कैदियों की केस हिस्ट्री का अध्ययन करेंगे। उनके रोज के व्यवहार पर निगाह रखकर उनमें सकारात्मक बदलाव लाकर अवसाद से दूर रखेंगे।

सूबे में दो महिला मंडल कारा मौजूद

सूबे में अमूमन सभी जेलों में एक-दो महिला बंदी की आमद और खर्च (बंदी के जेल में आगमन और मुक्ति की प्रक्रिया को जेल की पारंपरिक भाषा में आमद और खर्च कहा जाता है) होती रहती है। लेकिन महिला बंदियों के लिए भागलपुर स्थित महिला मंडल कारा और बक्सर महिला कारा ही है जहां महिला बंदियों को रखा जाता है। भागलपुर की महिला मंडल कारा में 86 महिला बंदी हैं जिनके साथ 13 बच्चे भी रह रहे हैं। इनकी देखरेख के लिए चार चिकित्सकों डॉ. मृत्युंजय, डॉ. कुमार अनु, डॉ. सुनीता झा, डॉ. स्वाति की तैनाती है।

Posted By: Dilip Shukla

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