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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 11, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बिहार के ख‍गडि़या में गंगा किनारे प्रतीक ने 61 घंटे तक गायी गजल, दिलों को जोड़ने वाली बेतरीन प्रस्‍तुति, बनाया रिकार्ड

By Dilip Kumar ShuklaEdited By:
Published: Thu, 11 Nov 2021 04:59 PM (IST)

बिहार के ख‍गडि़या में गंगा किनारे एक कार्यक्रम आयोजित की गई। इस दौरान वहां प्रतीक ने 61 घंटे तक गायी ...और पढ़ें

खगडि़या में गंगा किनारे गजलों की प्रस्‍तुति देते प्रतीक।
खगडि़या में गंगा किनारे गजलों की प्रस्‍तुति देते प्रतीक।

संवाद सूत्र, परबत्ता (खगडिय़ा)। खगडिय़ा के लाल प्रतीक कुमार ने गजल गायिकी में रिकार्ड कायम किया है। जिले के गंगा किनारे के माधवपुर गांव निवासी युवा गायक प्रतीक ने श्रीकृष्ण इंटर विद्यालय नयागांव के सभागार में लगातार 61 घंटे तक गजल गायन किया। यह इंडिया बुक आफ रिकार्ड का 'रिकार्ड' है। इंडिया बुक आफ रिकार्ड के बिहार चैप्टर के निर्णायक धर्मेंद्रनाथ ने इसकी पुष्टि की है। वे श्रीकृष्ण इंटर विद्यालय के सभागार में गजल गायन के दौरान शुरू से लेकर समापन तक मौजूद थे।

कोई भी गजल दुबारा नहीं गाई

प्रतीक पांच नवंबर की संध्या चार बजे गजल गाने बैठे और आठ नवंबर की सुबह पांच बजे कार्यक्रम का समापन हुआ। इस दौरान उन्होंने 61 घंटे में 427 गजल प्रस्तुत किए। खासियत यह रही कि कोई भी गजल दोबारा नहीं गाए गए। प्रतीक ने पहला ब्रेक सात घंटे पर लिया। निर्णायक धर्मेंद्रनाथ ने बताया कि नियम है कि कोई भी गायक गायिकी के दौरान एक घंटे पर पांच मिनट का ब्रेक ले सकते हैं। वे इकट्ठा भी ब्रेक ले सकते हैं।

गांव में प्रतिभा की कमी नहीं, बस, मंच मिले

प्रतीक ने कहा कि, इंडिया बुक आफ रिकार्ड का यह नया रिकार्ड बना है। वे गजल गायिकी को विस्तार देना चाहते हैं। मालूम हो कि प्रतीक जिले के परबत्ता प्रखंड के माधवपुर गांव के निवासी हैं। इस मौके पर मौजूद धर्मेंद्रनाथ ने कहा कि गांवों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है, उन्हें मंच मिले। प्रतीक की आवाज मखमली है। गजल गायिकी हुनर है। वे आगे और अच्छा करेंगे। मालूम हो कि कार्यक्रम के समापन बाद धर्मेंद्रनाथ ने प्रतीक को मैडल एवं प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया। रेडियो वृष्टि की ओर से भी कार्यक्रम की रिकार्डिंग की गई।

यह विश्व रिकार्ड नहीं है। यह इंडिया बुक आफ बैनर के तले रिकार्ड बना है। प्रतीक में अपार संभावना है। - धर्मेंद्रनाथ, निर्णायक, इंडिया बुक आफ रिकार्ड, बिहार चैप्टर।