भागलपुर। कमजोर और लचर व्यवस्था के कारण भागलपुर के लोगों को एक साल तक बिजली संकट झेलना पड़ेगा। क्योंकि, बिजली विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। उसपर उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ रही संख्या के कारण लोडशेडिंग कर बिजली आपूर्ति की जा रही है। हालांकि इस समस्या से निजात के लिए विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शहर में छह और पावर सब स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके लिए सरकार को पत्र लिखा गया है। 12 महीने में योजना पूरा करने की योजना है। इससे यह साफ हो गया है कि उपभोक्ताओं को एक साल तक बिजली की समस्या से जूझना पड़ेगा। तपिश भरी गर्मी में ट्रिपिंग की समस्या भी बढ़ गई है। दिनभर में आठ-दस बार ट्रिपिंग होने से बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है। गुरुवार को भी ट्रिपिंग की वजह से सिविल सर्जन, टीटीसी, मिरजानहाट, विक्रमशिला, मोजाहिदपुर, हबीबपुर, नाथनगर, जेल, मायागंज व बरारी समेत एक दर्जन फीडरों से जुड़े इलाकों की ढाई से तीन घंटे आपूर्ति प्रभावित हुई।

पावर सब स्टेशनों की आधारभूत संरचना को विकसित नहीं की जा सका है। पुराने उपकरणों से ही काम चलाया जा रहा है। सबौर ग्रिड को पर्याप्त बिजली मिलने के बाद भी विभाग की लचर व्यवस्था के कारण उमस भरी गर्मी में लोगों को बिजली संकट झेलना पड़ रहा है।

सब स्टेशनों की हालत खराब

सब स्टेशनों की बात करें तो अलीगंज, मोजाहिदपुर, टीटीसी, सिविल सर्जन, नाथनगर की हालत खराब है। टीटीसी सब स्टेशन में खलीफाबाग, नयाबाजार व मसाकचक तीन फीडर हैं। इन तीनों फीडर के ब्रेकर व पैनल की स्थिति अच्छी नहीं है। मरम्मत कर ब्रेकर और पैनल चलाए जा रहे हैं। इसकी वजह से काफी कम लोड पर भी ट्रांसफार्मर गर्म हो जाता है। गर्म होने के कारण प्रतिदिन इन फीडरों को तीन-चार घंटे बंद कर दिया जाता है।

पावर हाउस के सभी ब्रेकर व पैनल तीस साल पुराने

अलीगंज पावर हाउस की स्थिति और भी खराब है। इस पावर हाउस से मिरजानहाट, विक्रमशिला, हबीबपुर, पटलबाबू, कजरैली व जगदीशपुर फीडर को बिजली आपूर्ति की जाती है। इस पावर हाउस में 33 केवी लाइन की तीन व 11 केवी लाइन की छह ब्रेकर एवं सात पैनल हैं। इनमें सभी ब्रेकर 25-30 साल पुराने हैं। पुराने ब्रेकरों की मरम्मत कर काम चलाया जा रहा है। पुराने ब्रेकरों से ही बिजली आपूर्ति की जा रही है। हालांकि तीन-चार पैनल, चार्जर व बैटरी जरूर बदले गए हैं। आटो स्विच सिस्टम तक व्यवस्था नहीं की गई है। इस पावर हाउस में लोड के मुताबिक 45 एमवीए के पावर ट्रांसफार्मर की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन 35 एमवीए ट्रांसफार्मर से काम चलाया जा रहा है।

लगाए गए हैं जरूरत से कम क्षमता के ट्रांसफार्मर

यही स्थिति मोजाहिदपुर पावर स्टेशन की भी है। 25-30 साल पुराने ब्रेकर व पैनल नहीं बदले गए हैं। पंद्रह एमवीए के पावर ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। जरूरत से कम क्षमता के ट्रांसफार्मर होने तथा पुराने उपकरणों के सहारे आपूर्ति की व्यवस्था से इस पावर हाउस से जुड़े इलाकों के लोगों को बिजली की गंभीर समस्या से जूझना पड़ता है। गर्मी में छह-सात घंटे बिजली कटौती की जाती है।

ब्रेकर और पैनल चलने लायक नहीं

सिविल सर्जन उपकेंद्र से भीखनपुर व घंटाघर फीडर के अलावा टीटीसी को भी बिजली वितरित की जाती है। भीखनपुर फीडर का ब्रेकर, पैनल, सीटी-पीटी, चार्जर व बैटरी बदले गए हैं। लेकिन 20-25 साल पुराने टीटीसी के 33 व 11 केवी लाइन के ब्रेकर और पैनल नहीं बदले गए हैं। ब्रेकर और पैनल चलने लायक नहीं हैं। मरम्मत कर किसी तरह इससे बिजली आपूर्ति की जा रही है। लोड के हिसाब से 25 एमवीए का ट्रांसफार्मर की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन 15 एमवीए के ट्रांसफार्मर ही लगाए गए हैं। दस और पांच एमवीए के एक-एक ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। गर्मी में लोड बढ़ने से ट्रिपिंग की समस्या काफी बढ़ जाती है। एक दिन में 10-12 बार ट्रिपिंग होती है।

पावर सब स्टेशन की हालत तो खराब है ही उस पर जर्जर तार इस समस्या को और भी गंभीर बना देते हैं। लोड के कारण प्रतिदिन कहीं न कहीं जर्जर तार टूटकर गिर रहा है। नतीजतन, फीडरों के ब्रेक डाउन होने से तीन-चार घंटे आपूर्ति बाधित होती है।

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कोट फीडरों पर लोड बढ़ने के कारण ट्रिपिंग की समस्या खड़ी हो रही है। हालांकि सब स्टेशनों में पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई गई है। भागलपुर शहर में और छह पावर सब स्टेशन बनाए जाएंगे। इसका प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। 12 महीने में काम पूरा करने की योजना है। छह अतिरिक्त बनने के बाद सब स्टेशनों पर लोड काफी कम होगा। इसके बाद आपूर्ति की समस्या का समाधान हो जाएगा।

-पंकज कुमार, कार्यपालक अभियंता (शहरी), एसबीपीडीसीएल, भागलपुर आपूर्ति क्षेत्र।

Posted By: Jagran