भागलपुर [संजय सिंह]। शहर में तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण के कारण लोग कैंसर और दमा जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। यह चिंताजनक स्थिति है। डॉक्टर भी मानते हैं कि इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

यत्र-तत्र बिखरे कूड़ों के कारण वायु और जल दोनों ही प्रदूषित हो रहे हैं। भूगर्भीय जल भी प्रदूषित हो रहा है। कैंसर का एक कारण प्रदूषण भी है। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आंकड़े इस पुख्ता करते हैं कि किस तरह लोग बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इसी साल जनवरी से मार्च तक 26 लोगों की मौत कैंसर और आठ की दमा से हुई है। नाथनगर के तमौनी प्रखंड में एक दशक के दौरान दस लोगों की मौत कैंसर से हुई है। यहां कैंसर का कारण जल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होना बताया जाता है। डॉक्टर इस मौत के लिए अन्य कारणों के साथ-साथ प्रदूषण को भी बड़ा कारण मानते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार हर दस में से नौ व्यक्ति कहीं न कहीं ज्यादा प्रदूषण स्तर झेलने को विवश है।

सांस लेने लायक नहीं है हवा
सरकारी और निजी एजेंसी के आंकड़ों पर यदि गौर करें तो भागलपुर की हवा तेजी से प्रदूषित हो रही है। यहां वायु गुणवत्ता स्तर 62.50 पीएम तक पहुंच चुका है। जल की स्थिति तो पहले से ही खराब है। यहां के जल में फ्लोरायड और आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने की वजह से भी लोग बीमार हो रहे हैं। जल में आर्सेनिक की मानक से अधिक मात्रा त्वचा रोग समेत कैंसर का भी कारण बनता है।

वाहनों का धुंआ ज्यादा खतरनाक
शहर में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इससे निकलने वाले धुएं दमे के मरीजों के लिए परेशानी पैदा करते हैं। इससे स्वस्थ लोग भी दमे के शिकार हो रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है।

वरीय फिजीशियन डा.एके सिन्हा ने कहा कि प्रदूषण से दमा का प्रतिशत बढ़ा है। स्मॉग का बच्चों और अस्थमा के मरीजों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। स्मॉग के छिपे केमिकल के कण दमा की संभावना को को और बढ़ा देते हैं।

जेएलएनएमसीएच के सर्जन डा. जेपी सिन्हा फेफड़े और आंत के कैंसर का बड़ा कारण प्रदूषण है। इससे मृत्यु दर में इजाफा हुआ है।

Posted By: Dilip Shukla

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