भागलपुर [नवनीत मिश्र]। बिहपुर प्रखंड के अमरपुर के रहने वाले ध्रुव कुमार के बाग की लीची के अंग्रेज भी मुरीद हैं। यही कारण है कि हर वर्ष मंजर आने के पहले ही व्यवसायी उनके बगान तक आने लगते हैं। खुद से तैयार किए गए जैविक खाद और रसायन का पेड़ों पर छिड़काव करने की वजह से देसी लीची की खुशबू और मिठास विदेशियों तक को आकर्षित करती है।

लीची के बड़े व्यापारी में शुमार बेंगलुरु के सेवा सिंह ध्रुव के बगान से लीची खरीदकर इंगलैंड भेजते हैं। वह लीची खरीदकर मुजफ्फरपुर ले जाते हैं और वहां पैकिंग कर बेंगलुरु ले जाते हैं। वहां से लीची इंग्लैंड भेजी जाती है। व्यवसायी सेवा सिंह पहले लीची के केमिकल से जांच करते हैं। मेच्योरिटी टेस्ट के बाद ही लीची तोड़ी जाती है। इससे पेड़ का नुकसान नहीं होता है और अगले साल अच्छी पैदावार होती है।

कई किस्म की लीची

ध्रुव कुमार 35 एकड़ में लीची की बागबानी किए हुए हैं। वह हर वर्ष 50 लाख लीची बेचते हैं। उनके बाग में देसी, मनराजी और बेदाना लीची के पेड़ हैं। इनमें से देसी लीची अंग्रेजों की पसंदीदा है।

लीची के बंपर उत्पादन के गुर

- लीची टूटने के बाद जून के दूसरे सप्ताह में पेड़ों का पोषण प्रबंधन शुरू।

- पेड़ की डालियों को तोड़ते हैं, ताकि अगले साल पूरा पेड़ मंजर से लद जाए।

- खेतों की जोताई कर पेड़ों में वर्मी कंपोस्ट, अंडी और नीम की खल्ली डालते हैं।

- पानी जमने वाले पेड़ों के पास चूना और जिंक डालते हैं।

- बारिश समाप्त होने के बाद तूतिया और चूना मिलकर पेड़ों को साढ़े तीन फीट तक रंगते हैं।

- अक्टूबर से नवंबर के बीच वर्मी कंपोस्ट, अंडी और नीम का खल्ली डालते हैं।

- मंजर आने के पहले गोमूत्र से तैयार केमिकल और नीम के तेल का छिड़काव करते हैं।

- मंजर आने के बाद दुग्धी और गोमूत्र से तैयार केमिकल का छिड़काव करते हैं।

- फल आने के पहले वे बोरोन का प्रयोग करते हैं। फल आने के बाद बोरिक एसिड का प्रयोग करते हैं।

देसी लीची की बढ़ी मांग

ध्रुव कुमार बताते हैं कि लीची रिसर्च इंस्टीच्यूट, मुजफ्फरपुर आने-जाने के क्रम में देसी लीची के बारे में चर्चा की गई। चार वर्ष पूर्व वहां के वैज्ञानिक लीची देखने बिहपुर आए। इसकी चर्चा वैज्ञानिकों ने बड़े व्यवसायियों से की। तीन साल से बड़े व्यवसायी आकर लीची लेकर विदेश भेज रहे हैं।

25 से 30 हजार एकड़ में लीची के बगान

पूरे नवगछिया इलाके में 25 से 30 हजार एकड़ में लीची के बगान हैं। अभी बिना बिना फल लगे तीन सौ रुपये हजार लीची बिक रही है। फल लगने के बाद कीमत चार सौ से पांच सौ रुपये हजार हो जाती है।

लीची में मौजूद पोषक तत्व

लीची में शर्करा (11 फीसद), प्रोटीन (0.7 फीसद), वसा (0.3 फीसद) एवं अनेक विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

 

Posted By: Dilip Shukla

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