बेटे की लाश तक नहीं मिली! भागलपुर में उजड़े आशियानों के बीच पहुंचे पूर्णिया MP पप्पू यादव; देखते ही छलके आंसू
Bhagalpur Flood Pappu Yadav Visit: पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भागलपुर के बाढ़ग्रस्त खरीक और गोराडीह क्षेत्रों का दौरा कर ...और पढ़ें

Bhagalpur Flood Pappu Yadav Visit: 'अपनों की लाशें और उजड़ी जिंदगी गरीबों की नियति नहीं'; खरीक व गोराडीह में पीड़ितों से मिले सांसद पप्पू यादव, बांटी आर्थिक मदद
HighLights
पप्पू यादव ने भागलपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
मृतकों के परिजनों और नाव गंवाने वालों को आर्थिक सहायता दी।
40 साल के जल प्रबंधन घोटालों की सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Flood Pappu Yadav Visit: "जिस मां-बाप का 15 दिन से लापता बेटा गंगा के सीने में दफन हो और जिसे आखिरी बार देखने तक का नसीब न मिला हो, उस बेबस परिवार की चीखें किसी भी पत्थर दिल इंसान को रुला देंगी। बाढ़ और अपनों की मौतें गरीबों की नियति नहीं हैं, बल्कि यह निकम्मी व्यवस्था और कमीशनखोर तंत्र का रचा हुआ पाप है।"
यह उद्गार पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भागलपुर जिले के जलमग्न क्षेत्रों में बाढ़ पीड़ितों के आंसू पोंछते हुए व्यक्त किए। सांसद ने शुक्रवार को खरीक प्रखंड के राघोपुर (वार्ड 8 और 9) तथा गोराडीह प्रखंड के विभिन्न बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर तबाही का भयावह मंजर देखा।
पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भागलपुर के खरीक व गोराडीह प्रखंड के अतिसंवेदनशील बाढ़ प्रभावित इलाकों का लिया जायजा
गोराडीह के कोयली खुटाहा में पानी में डूबने से जान गंवाने वाले एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत पांच मृतकों के परिजनों को सौंपी 50 हजार रुपये की सहायता
15 दिनों से गंगा में लापता बादल मंडल के परिजनों को 25 हजार और 70 लाख की नाव गवां चुके सिकंदर मंडल के परिजनों को दी आर्थिक मदद; 100 महिलाओं को बांटी नकद राशि
एंटी-इरोजन और फ्लड फाइटिंग के नाम पर लूट का लगाया आरोप, 40 वर्षों के जल प्रबंधन घोटालों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की कही बात
चारों ओर मटमैले पानी में डूबे घर, छतों पर तिरपाल ताने भूखे-प्यासे लोग और खैरपुर-अतगामा बांध पर गहराते खतरे के बीच पहुंचे सांसद ने पीड़ितों की सुध ली। उन्होंने राघोपुर और आसपास के जलमग्न इलाकों में पहुंचकर 100 से अधिक बेसहारा बाढ़ पीड़ित महिलाओं को तत्काल भरण-पोषण के लिए अपनी ओर से नकद आर्थिक सहायता दी।
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गोराडीह में पांच मौतों से पसरा मातम
गोराडीह प्रखंड अंतर्गत कोयली खुटाहा गांव (वार्ड-3) पहुंचे सांसद का कलेजा उस वक्त कांप उठा जब वे उस अभागे परिवार से मिले, जिसके पांच सदस्य बीते दिन पानी में डूबने से काल के गाल में समा गए। इस हृदयविदारक हादसे में मुकेश साह की पत्नी मंथो देवी, पुत्री सोनाक्षी (13), पुत्र अभिषेक (10), पुत्र अक्षय (8) और पड़ोसी कपिलदेव साह की पुत्री अंशु (17) की जान चली गई थी। रोते-बिलखते परिजनों से लिपटकर सांसद भावुक हो गए। उन्होंने शोकाकुल परिवार को संबल देते हुए प्रत्येक मृतक के नाम पर 10-10 हजार रुपये यानी कुल 50 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता सौंपी।
शोकाकुल परिजनों को 50 हजार की मदद
वहीं, लोदीपुर निवासी बादल मंडल—जो करीब 15 दिनों पूर्व गंगा के तेज बहाव में बह गए थे और जिनका शव आज तक बरामद नहीं हो सका—के घर पहुंचकर सांसद ने परिजनों को ढांढस बंधाया और 25 हजार रुपये की नकद मदद दी। इसके अलावा, जमीन बेचकर 70 लाख रुपये में नाव बनाने वाले सिकंदर मंडल की नाव सैलाब में समा जाने पर उनके परिजनों को भी 25 हजार रुपये की सहायता प्रदान की।
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'सरकार के पास पैसा है तो पीड़ितों को तत्काल 50 हजार क्यों नहीं?'
बाढ़ राहत व्यवस्था की विफलता पर कड़ा प्रहार करते हुए सांसद ने कहा कि क्षेत्र के बड़े जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों का घर-परिवार भी इसी इलाके से आता है, फिर भी आम जनता भगवान भरोसे जीने को मजबूर है। उन्होंने सवाल दागा कि जब खजाने में धन की कोई कमी नहीं है, तो संकट की घड़ी में पीड़ित परिवारों के पास प्रशासनिक अमला पहुंचकर तुरंत 50-50 हजार रुपये की नकद राहत क्यों नहीं बांट रहा?
उन्होंने कहा कि एंटी-इरोजन और फ्लड फाइटिंग के नाम पर सालभर कागजी घोड़े दौड़ाए जाते हैं, करोड़ों के वारे-न्यारे होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बाढ़ आते ही तटबंध टूट जाते हैं और गरीब अनाथ होकर पानी में बह जाते हैं। सिकंदर मंडल जैसे लोगों ने अपनी संपत्ति बेचकर लोगों की जान बचाने के लिए नावें तैयार कीं, लेकिन जब उनकी नाव डूबी तो न संवेदक आगे आया और न ही प्रशासन ने कोई मदद की।
सुप्रीम कोर्ट में दायर करेंगे याचिका
सांसद ने सरकार से मांग की कि हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के आश्रितों को कम से कम 10-10 लाख रुपये और अन्य मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का अविलंब मुआवजा दिया जाए। साथ ही नाव क्षति का भी उचित हर्जाना मिले।
40 वर्षों की जांच की मांग
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि वे इस व्यवस्थागत भ्रष्टाचार के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे। प्रधानमंत्री को दस बार पत्राचार करने के बाद अब वे सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर पिछले 40 वर्षों के दौरान जल संसाधन विभाग, सिंचाई परियोजनाओं, तटबंध निर्माण और फ्लड फाइटिंग के नाम पर ठेकेदारों, अधिकारियों और सफेदपोशों द्वारा हड़पे गए अरबों रुपये तथा उनकी अकूत संपत्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करेंगे।
