सुपौल, जेएनएन। बेशक यह साल किसानों से लेकर आम जनों के लिए मुश्किलों का रहा है। कोविड-19 जैसी महामारी, बाढ़ और अतिवृष्टि से लोग प्रभावित हुए हैं। तटबंध के अंदर बड़े भूभाग में लगी फसलों को बाढ़ बर्बाद कर देती है लेकिन इस बार बाढ़ के प्रभाव से वंचित प्रखंडों के किसानों को भी फसल की बर्बादी का मुंह देखना पड़ा है।

धान रोपनी के समय और हाल के दिनों में हुई अत्यधिक बारिश से फसल क्षति होने पर सरकार सहायता राशि देती है लेकिन इस बार किसानों को इस सहायता राशि मिलने में संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है। विधानसभा चुनाव को ले आचार संहिता लागू हो जाने के बाद फिलहाल इसकी स्वीकृति पर ब्रेक लग गई है।

इस सहायता के लिए अब किसानों को इंतजार करना होगा। दरअसल इस बार खरीफ के शुरुआती दिनों से ही अतिवृष्टि ने किसानों का पीछा नहीं छोड़ा है। बिचड़ा बोने तक तो सब कुछ ठीक-ठाक रहा परंतु उसके बाद बारिश ने किसानों को दर्द ही दिया है। खरीफ फसल को ले बिचड़ा बोने के समय हुई बारिश ने किसानों को बहुत बड़ी राहत दी जिससे किसान खुश दिख रहे थे परंतु किसानों की यह खुशी बहुत दिनों तक नहीं रही। बिचड़ा जब रोपने लायक हो गया और कुछ किसानों ने धान की रोपाई भी कर ली तो इसी बीच हुई बारिश ने किसानों को बेहाल कर दिया। मई-जून में अत्यधिक बारिश के कारण रुपए गए धान को नुकसान पहुंचाया। अत्यधिक बारिश के कारण धान और बिचड़ा दोनों पानी में डूबे रहने के कारण गल गए। किसानों की मेहनत भी बेकार चली गई। बिचड़ा बर्बाद हो जाने के कारण जिले में करीब छह हजार हेक्टेयर खेत में धान की रोपाई कम हुई। इस वर्ष जिले को 86 हजार हेक्टेयर खेत में धान लगाने का लक्ष्य दिया गया था लेकिन बिचड़ा के अभाव में यह 80 हजार हेक्टेयर ही रोपाई हो पाई। इधर धान की फसल में दाने लगने ही वाले थे कि पिछले दिनों हुई बारिश के कारण फसल की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल दिया है। किसानों का कहना है कि पिछले दिनों हुई बारिश के कारण खेतों में जल जमा है जिससे फसलों में रोग लगने की संभावना बढ़ गई है तथा पैदावार भी कम होने की संभावना है।

प्राकृतिक आपदा के कारण मिलती सहायता राशि

प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की फसल क्षति होने पर सरकार फसल क्षति सहायता राशि देती है जिससे किसानों को तत्काल आर्थिक मदद मिल जाती है इस बार भी किसानों को लग रहा था कि अतिवृष्टि के कारण बर्बाद हुई फसल का मुआवजा मिल पाएगा लेकिन विधानसभा चुनाव के कारण लगे आचार संहिता ने किसानों के इस मंसूबे पर पानी फेर दिया है। आचार संहिता लग लग जाने के कारण सहायता राशि की स्वीकृति पर ग्रहण लग जाने के कारण इस सहायता राशि के लिए फिलहाल किसानों को इंतजार करना होगा

हाल के दिनों में हुई बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा है। क्षति के आकलन को ले सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही क्षति का सही-सही आकलन हो पाएगा। - समीर कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी।

 

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