संवाद सूत्र, बलरामपुर (कटिहार): बलरामपुर प्रखंड के लोग स्वच्छ पेयजल के लिए वर्षों से मोहताज हैं। कहने के लिए तो समय समय पर सरकार की ओर से लोगों को स्वच्छ पेयजल हर हाल में उपलब्ध कराने का ढिंढोरा पिटा जाता है। लेकिन धरातल पर तमाम सरकारी घोषणाओं का अवतरण नहीं हो पाता है। बलरामपुर प्रखंड में लोग वर्षों से लौहयुक्त, आर्सेनिक रसायन मिश्रित अशुद्ध जल पीने को विवश हैं। प्रखंड अंतर्गत तमाम चापाकल के जल में लौह की मात्रा प्राय: अधिक होती है। रात भर के रखे हुए जल को यदि सुबह देखा जाए तो पानी की ऊपरी परत छाली युक्त दिखाई देती है।

आजादी के बाद से ही शुद्ध पेयजल नसीब नहीं: यह विडंबना ही है कि आजादी के इतने वर्षों के बाद भी सरकार आमजनों के लिए अब तक शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं कर पाई है। वर्षों पूर्व शुरू किये गए अमृत पेयजल धारा योजना का हाल तो सभी ने देख ही लिया है। इस योजना पर जहां सरकार का करोड़ों धन जाया हुआ। वहीं उपलब्धि के नाम पर कुछ भी हस्तगत नहीं हुआ। बलरामपुर एवं प्रखंड मुख्यालय तेलता में लगभग आठ नौ वर्ष पूर्व लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए दोनों जल मीनार महज शोभा बढ़ाने का काम कर रही है। दोनों ही जगहों पर लोगों के हलक में शुद्ध पेयजल की एक बूंद भी नहीं जा सकी है। स्वच्छ पेयजल के लिए अब तक की समस्त सरकारी योजनाएं निरर्थक साबित हुई है।

अशुद्ध पेयजल बन रही है बीमारी का कारण: अशुद्ध पेयजल प्रखंड क्षेत्र में लोगों के लिए विभिन्न बीमारी का कारण बन कर सामने आ रही है। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बलरामपुर के आयुष चिकित्सक डॉ राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि दूषित पेयजल के सेवन से क्षेत्र के लोगों में उदर संबंधी रोग अत्यधिक मात्रा में पायी जाती है। आर्सेनिक रसायन मिश्रित जल के कारण आंत, फेफड़ा एवं अन्य प्रकार के कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है।

क्या कहते हैं बलरामपुर के लोग: बलरामपुर प्रखंड के लोगों में दोनों ही जल संयंत्रों के चालू नहीं होने से आक्रोश दिख रहा है। भाजपा नेता संजीव मिश्रा, जदयू प्रखंड अध्यक्ष कमल चंद्र दास, राजद नेता मसीबुर रहमान, पूर्व उप प्रमुख संतोष साह, पैक्स अध्यक्ष अंसार आलम, देवकुमार मोदक, मुखिया अब्दुस समद उर्फ लाडला, जदयू युवा प्रखंड अध्यक्ष पंकज कुमार सहित कई लोगों ने बलरामपुर प्रखंड अंतर्गत स्थापित दोनों ही जल संयंत्रों को अविलंब चालू कर जल आपूर्ति शुरू करने की मांग की है।

Edited By: Shivam Bajpai