विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण की असली कुंजी! भागलपुर में बोलीं पद्मश्री निवेदिता भिड़े, स्वामी विवेकानंद को अपनाएं युवा

Published: Mon, 21 Sep 2026 11:55 PM (IST)

Bhagalpur Vivekananda Kendra Yuva Samvad: विवेकानंद केंद्र, भागलपुर द्वारा आयोजित 'युवा संवाद' में पद्मश्री निवेदिता भिड़े ने युवाओं को स्वामी ...और पढ़ें

Bhagalpur Vivekananda Kendra Yuva Samvad: भागलपुर में विवेकानंद केंद्र का युवा संवाद।

Bhagalpur Vivekananda Kendra Yuva Samvad: भागलपुर में विवेकानंद केंद्र का युवा संवाद।

HighLights

  1. पद्मश्री निवेदिता भिड़े ने 'युवा संवाद' में युवाओं को प्रेरित किया।

  2. स्वामी विवेकानंद के विचारों से चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा पर जोर।

  3. चरित्र निर्माण को राष्ट्र निर्माण की असली कुंजी बताया।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Vivekananda Kendra Yuva Samvad: नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, निस्वार्थ सेवा भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण का संचार करने के उद्देश्य से विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की भागलपुर शाखा द्वारा सोमवार को भव्य ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शाम चार से छह बजे तक चले इस प्रेरणादायी सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पद्मश्री निवेदिता रघुनाथ भिड़े ने युवाओं का मार्गदर्शन किया।

वहीं, जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के प्राचार्य डॉ. संदीप लाल कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शरीक हुए। मुख्य वक्ता पद्मश्री निवेदिता भिड़े ने स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन और राष्ट्र निर्माण से जुड़े उनके युगांतकारी विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अपनी युवावस्था सहित समूचा जीवन राष्ट्र के पुनरुत्थान और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया था।

जीवन में तमाम बाधाओं, अभावों और व्यक्तिगत संघर्षों के बावजूद उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रकाश पहुंचाने का संकल्प नहीं छोड़ा। आज के युवाओं को उनके इसी त्याग और ओजस्वी विचारों से सीख लेकर राष्ट्र सेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए।

शिकागो संबोधन ने पूरे विश्व को कराया भारत की मेधा से अवगत

पद्मश्री भिड़े ने 11 सितंबर 1893 को शिकागो में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिए गए ऐतिहासिक संबोधन का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस एक संबोधन की शुरुआती पंक्तियों ने पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति, अद्वैत दर्शन, मानवीय मूल्यों और विश्व बंधुत्व की शक्ति का कायल बना दिया था। उन्होंने युवाओं से केवल बौद्धिक विकास तक सीमित न रहकर स्वामी जी के उन शाश्वत आदर्शों को अपने आचरण और दैनिक जीवन में उतारने की अपील की।

चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण का मूल आधार

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. संदीप लाल ने युवा शक्ति को किसी भी देश की सबसे अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि जब तक युवा पीढ़ी का वैचारिक व नैतिक स्तर ऊंचा नहीं होगा, तब तक किसी भी मजबूत राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए युवाओं में नैतिक संस्कारों और सुदृढ़ चरित्र का निर्माण पहली शर्त है। चरित्र निर्माण ही वास्तव में राष्ट्र निर्माण का मूल आधार है। उन्होंने छात्रों को निरंतर ज्ञानार्जन करने और अपने व्यक्तित्व को सर्वगुण संपन्न बनाने की सलाह दी।

समाजसेवा से जुड़ने का आह्वान

इससे पूर्व विवेकानंद केंद्र के नगर संचालक ने अतिथियों का औपचारिक स्वागत करते हुए युवाओं को रचनात्मक सामाजिक गतिविधियों से जुड़ने को प्रेरित किया। मंच का संचालन प्रो. मिहिर मोहन मिश्र 'सुमन' ने किया, जबकि प्रो. राज भूषण प्रसाद ने विवेकानंद केंद्र के उद्देश्यों और सामाजिक आयामों की विस्तृत रूपरेखा रखी।

सुधीर तिवारी ने अतिथियों का परिचय कराया तथा अंत में डॉ. विजय कुमार वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में गौतम, राहुल, अंकित, मनोज अस्थाना, अक्षरा, रितिका, श्वेता और रिमझिम सहित केंद्र के कई समर्पित स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।