संवाद सूत्र, धरहरा (मुंगेर)। तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के दौर में सरकारी आदेशों का अवहेलना कर प्रखंड के कई निजी विद्यालय व कोचिंग संस्थानों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। जबकि बीते शनिवार को बिहार सरकार के गृह विभाग ने शिक्षा विभाग को निजी व सरकारी संस्थान में 11 अप्रैल तक शैक्षिक क्रियाकलाप स्थगित रखने का आदेश दिया। डीएम ने भी आदेश जारी कर जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को गृह विभाग के आदेश को सुनिश्चित कराने को कहा। इसके बावजूद गुरुवार को कई स्कूल सहित कई कोङ्क्षचग संस्थान खुला रहा ।

इधर, एक विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा कि पाबंदी के कारण हमलोगों को भूखे मरने की नौबत आ गई है। सरकार जुलूस, रैली आदि कार्यक्रमों पर रोक लगाने के बजाय शिक्षण संस्थानों को बंद कराने पर तुली है। अभिभावकों के अनुमति पश्चात ही विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। वहीं, कोरोना गाइडलाइन के तहत शारीरिक दूरी के संबंध में उन्होंने बताया कि बच्चों के शरीर तापमान का नियमित जांच किया जाता है। तापमान अधिक रहने पर विद्यालय में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाती है। वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन को स्वयं ही कोरोना को लेकर शिक्षण कार्य स्थगित कर देना चाहिए। यदि कोई दुखद घटनाएं घटती है तो इसके जिम्मेदार वे स्वयं होंगे। यद्यपि विद्यालय एवं कोङ्क्षचग के विरुद्ध आवश्यक संवैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

निजी विद्यालय के शिक्षकों को सरकार दे जीवन यापन भत्ता

संवाद सूत्र, धरहरा (मुंगेर): प्रखंड के लगभग सभी निजी विद्यालय शिक्षा विभाग के आदेशानुसार विगत सोमवार से ही बंद है। बीते वर्ष भी पूरा सत्र विद्यालय बंद रहा। परिणाम स्वरूप छात्रों द्वारा शुल्क नहीं लिया गया। ऐसा होने से निजी विद्यालय के शिक्षक की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है। विद्यालय बंद होने के कगार पर है। साथ ही बच्चों के शैक्षणिक स्तर निम्न हो गया है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के सचिव मधु कुमारी ने जिला पदाधिकारी एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस पर ङ्क्षचतन करने की मांग की है। उन्होंने सरकार से निजी विद्यालयों के शिक्षकों को जीवन यापन भत्ता देने की मांग की है। साथ ही शीघ्र पुन: विद्यालय खुलवाने की मांग भी की।  

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