बांका [रवि वर्मा]। माइक्रोवैक्ट्रियम लेप्री नामक जीवाणु से होने वाले कुष्ठ रोग से लोगों को जल्द ही निजात मिलेगी। इस जीवाणु के खात्मे के लिए दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ तलवार ने एमआइपी नामक वैक्सीन की खोज की है। इस वैक्सीन के टीकाकरण से कुष्ठ उन्मूलन अभियान को नया आयाम मिलेगा। पूरे विश्व में पहली बार इसके टीकाकरण की शुरुआत बांका जिले से की जाएगी।

अप्रैल से शुरू होगा इलाज

अप्रैल में यहां कुष्ठ नियंत्रण विभाग की ओर से एमआइपी टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर बांका जिला कुष्ठ उन्मूलन अभियान में अव्वल रहा है। इसके लिए बांका को दो बार नेशनल टेंप्रोसी एरिडेशन सम्मान मिला है। इसे देखते हुए फ्यूचर एक्सपेंशंस के तहत एमआइपी टीकाकरण अभियान के लिए बांका का चयन किया गया है। पहले चरण में गुजरात के एक जिले को भी इस अभियान में रखा गया है। इस टीकाकरण से कुष्ठ रोग होने की आशंका समाप्त हो जाएगी।

अभी एमडीटी से हो रहा इलाज

अभी कुष्ठ मरीजों का इलाज मल्टी ड्रग थेरेपी व एमडीटी से किया जा रहा है। इसके लिए मरीजों को विभाग की निगरानी में छह माह से एक साल तक कैलेंडर के माध्यम से नियमित एमडीटी की दवा खिलाई जाती है। एमडीटी में डैपसोन, रिफांपीसीन एवं क्लोफॉजिमिन दवा का मिश्रण होता है, जो पहली ही खुराक में 90 फीसद से अधिक जीवाणुओं को समाप्त कर देता है।

बांका ने हासिल किया है 01.14 का लक्ष्य

सरकार ने कुष्ठ उन्मूलन के लिए दस हजार लोगों पर एक मरीज पाए जाने का लक्ष्य रखा है।  इसमें बांका ने अब तक 01.14 का लक्ष्य हासिल किया है। कुष्ठ उन्मूलन अभियान में यह जिला पहले पायदान पर है। बावजूद, जिले में कुष्ठ रोगियों की फेहरिस्त लंबी है। जिले के आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल 2017 से अबतक यहां 813 कुष्ठ रोगियों की पहचान की गई है। इनमें अभी 497 मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इससे पूर्व चिह्नित किए गए 1268 कुष्ठ मरीजों में 898 मरीजों का उपचार कर कुष्ठ रोग से मुक्त किया जा चुका है।

कुष्ठ उन्मूलन की दिशा में जिले को नया आयाम मिलेगा। इसके लिए अप्रैल से बांका जिले से एमआइपी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की जाएगी। माइक्रोवैक्ट्रियम लेप्री नामक जीवाणु को खत्म करने के लिए भारत के वैज्ञानिक डॉ तलवार ने एमआइपी वैक्सीन की खोज की है। इसके टीकाकरण से कुष्ठ बीमारी को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकेगा। कुष्ठ उन्मूलन की दिशा में बेहतर काम करने के कारण सरकार इस अभियान की शुरुआत बांका से कर रही है।

- मृत्युंजय कुमार सिंह

चिकित्सा सहायक, कुष्ठ नियंत्रण विभाग, बांका

Posted By: Ravi Ranjan

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