आनलाइन डेस्क, भागलपुर। अगस्त के अंतिम सप्ताह पूर्णिया पहुंची भोपाल एसटीएफ (Bhopal STF) ने मेडिकल में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले दो शातिर ठगों को गिरफ्तार किया। इसके बाद 12 सितंबर को यूपी के वाराणसी से पटना की एक छात्रा और उसकी मां को गिरफ्तार किया गया, छात्रा नीट परीक्षा (NEET Exam) में मूल अभ्यर्थी की जगह बैठने गई थी। इस गिरफ्तारी में पूछताछ के बाद खगड़िया के विकास को भी धर दबोचा गया। मामले में पटना के पीके को साल्वर गैंग (NEET Solver Gang) का सरगना बताया गया। भोपाल एसटीएफ ने जो गिरफ्तारी की, उससे आईआईटियन देवराज मिश्रा उर्फ रितु राज का नाम सामने आ रहा है, जो पटना का ही रहने वाला है। एक माह के भीतर हुई ये गिरफ्तारियां कई सवाल खड़े कर रहीं हैं। क्योंकि इन मास्टर माइंड की गिरफ्तारी अभी हुई, इससे पहले इन्होंने देशभर में कितनों को डाक्टर बना दिया ये जांच का विषय है।

पूर्णिया से भोपाल एसटीएफ ने एक होटल से मेडिकल में नामांकन कराने वाले पटना के संदीप करवरिया एवं मधुबनी के रहने वाले दीपक कुमार को गिरफ्तार किया। इनके पास से एक लैपटाप मिला, उससे कई राजफाश हुए। वहीं, ये गिरोह देशभर में 13 साल से लोगों को ठग रहा था। इनके अकाउंट से डेढ़ माह के भीतर करोड़ों का लेन-देन भी हुआ। बात यहीं तक सीमित नहीं है। पटना के शातिर संदीप के तो 49 बैंक अकाउंट भी मिले। उसकी पत्नी के बैंक अकाउंट से भी ठगी की राशि का ट्रांजक्शन किया जाता था। पटना का आईआईटियन देवराज मिश्रा इस गैंग का सरगना है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। बरामद लैपटाप से खुलासा हुआ कि ये दोनों शातिर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में अपना नया अड्डा बनाने वाले थे। भोपाल एसटीएफ ने इन्हें वहां के एक छात्र से 35 लाख रुपये की ठगी करने के बाद जाल बिछाकर गिरफ्तार किया।

अब बात करें वाराणसी की तो यहां पटना की बीडीएस स्टूडेंट और उसकी मां की गिरफ्तारी के बाद पटना के ही एक अन्य शातिर और खगड़िया के विकास को भी धर दबोचा गया। विकास कई सालों से पटना में रहकर पढ़ाई कर रहा था, ऐसा उसके गांव टोला के लोग कहते हैं। स्वजनों की मानें तो उन्होंने तो कभी ऐसा सोचा भी नहीं था। वहीं, गिरफ्तार हुई छात्रा ने बताया कि पिता सब्जी की दुकान लगाते हैं। आर्थिक स्थिति सही नहीं है। इसी का फायदा उठाकर पांच लाख का लालच दिया गया और उसे दूसरे की जगह परीक्षा देने के लिए फुल प्रिपेयर किया गया। मूल अभ्यर्थी के हस्ताक्षर की कई बार प्रैक्टिस कराई गई। मानें इस स्पष्ट होता है कि इस साल्वर गैंग का ये कोई पहला कारनामा नहीं होगा। इससे पहले भी न जाने कितनों की जगह इन्होंने अपने फर्जी कैंडिडेट बैठाए होंगे।

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कैसे और क्यों कर रहे चीट इंडिया?

पूर्णिया में हुई गिरफ्तारी में दोनों ठगों ने बताया कि वे नीट परीक्षा में बैठने वालों का डाटा लीक कर लेते थे। ये उसे खरीदते थे। इसके बाद संपर्क कर मेडिकल में दाखिला दिलाने के एवज में मोटी रकम वसूल कर लेते थे। इसके लिए वे खुद को कई कालेज का प्रोफेसर बताते फिरते थे। कम समय में अधिक रकम कमाना और अमीर बनने के चलते इन दोनों ने ये राह चुन ली। ये कइयों को दाखिला दिला भी चुके हैं, ऐसी बात भी निकलकर सामने आ रही है, जिसका ये उदाहरण देकर अन्य को ठगते थे।

अब बात करें खगड़िया के विकास की तो उसने रातों-रात जमीनें खरीदी, पटना पढ़ने गया युवक अचानक से रहन सहन बदल चुका था, गांव वाले दबी जुबान ऐसा कह रहे हैं। उनका कहना है कि वो खगड़िया में भी जमीन खरीदने वाला था लेकिन इससे पहले ये खबर सामने आ गई। वहीं दोस्तों ने तो अब फोन भी स्विच आफ कर लिया है। पटना की छात्रा हो या खगड़िया का विकास, दोनों आखिर क्यों इस गलत रास्ते पर उतरे उसके पीछे की वजह उनकी आर्थिक स्थिति और रातों-रात धनवान होने की चाह ही है, जिसका फायदा इस काम में जुड़े लोग आसानी से उठा लेते हैं। फिलहाल, देशभर से ऐसी गिरफ्तारी हो रहीं हैं। सवाल ये है कि जो इसमें सफल हो रहे है या होते आए हैं वो कितने फर्जी अभ्यर्थियों को, जो साल्वर की बदौलत पास हो मेडिकल में आगे बढ़ा चुके हैं। मुद्दा गंभीर इसलिए भी है क्योंकि ये सीधे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा है।

Edited By: Shivam Bajpai