(मिहिर सिन्हा) भागलपुर। नाथनगर सिल्क उद्योग के लिए लीनन साड़ी वरदान साबित हो रही है। इस साड़ी ने एक और जहां बुनकरों की आर्थिक हालत में सुधार ला दी है, वहीं दूसरी ओर पूरे देश में इसकी मांग ज्यादा होने से बुनकरों की भी जिंदगी बदलने लगी है। उन्हें लगातार काम मिल रहा है। कंप्यूटर डिजाइन और प्रिंट से सजी इस साड़ी की डिमांड के सामने सिल्क साड़ी के बाजार में कमी देखी जा रही है। एक बुनकर एक दिन में सिर्फ तीन साड़ी तैयार कर पाता है। जिसकी डेढ़ हजार से पांच हजार तक में बिक्री हो पाती है।

कंप्यूटर से निकलती है डिजाइन, फिर की जाती है प्रिंट

नई तकनीक से नाथनगर के बुनकर भी कदमताल कर रहे हैं। व्यापारी जियाउर रहमान कहते हैं कि यहां के सिल्क उद्योग को लीनन नई ऊंचाई दे रहा है। लीनन साड़ी की मांग देश के सभी राज्यों में है। बुनकर एक दिन में तीन साड़ी ही तैयार कर पाते कर पाते हैं। साड़ी बुनने से पहले कंप्यूटर पर इसकी प्रिंट तैयार की जाती है। रंगों का सही मिश्रण कंप्यूटर पर ही हो जाता है। रंगाई के बाद कारीगर इस प्रिंट को आसानी से लीनन की प्लेन साड़ी पर उतार देते हैं। साड़ी में कलर भी हेवी मशीन से किया जाता है। जिसकी वजह से इसका रंग और क्वालिटी किसी नामी कंपनी से कम नहीं होता है। साड़ी जब मशीन से निकलती है तो यह खासकर महिलाओं को अपनी काफी आकर्षित करती है।

कम कीमत और आकर्षण है इस साड़ी की पहचान

साड़ी की कीमत डेढ़ हजार से आरंभ होने के कारण हर वर्ग की महिलाएं इसे पसंद कर रही हैं। प्रियंका सिंह कहती हैं कि समय गर्मी का है इसमें चटख रंग आंख को सुकून देता है। लीनन की साड़ी का रंग न केवल चटख होता है बल्कि इसका कपड़ा भी गर्मी के अनुकूल होता है। ऐसे में इस गर्मी में हमारी पहली पसंद लीनन साड़ी ही है।

इन राज्यों में है लीनन की ज्यादा मांग

कोलकाता, हैदराबाद, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तराखंड, झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्य हैं जहां लीनन साड़ी की डिमांड ज्यादा है।

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