भजनों पर झूमीं महिलाएं, कांधा देने की मची होड़! आधी रात 'जय कन्हैया लाल की' से गूंजी सिल्क सिटी; बरारी में कौड़ी
सिल्क सिटी भागलपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। संकट मोचन दरबार से ...और पढ़ें

Janmashtami 2026 Bhagalpur: भागलपुर में धूमधाम से मनी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
HighLights
संकट मोचन दरबार से निकली सांईंनाथ की भव्य पालकी शोभायात्रा।
आधी रात मंदिरों में शंख-घंटे से गूंजा कान्हा का जन्मोत्सव।
बरारी में वर्षों पुरानी कौड़ी लुटाने की परंपरा उत्साह से निभाई गई।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व अपार श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। पूरा शहर दिनभर 'हरे कृष्ण' और 'सांईंनाथ महाराज' के जयघोष से गुंजायमान रहा। एक ओर जहां शहीद भगत सिंह चौक स्थित संकट मोचन दरबार से गाजे-बाजे के साथ सांईंनाथ महाराज की भव्य पालकी शोभायात्रा निकाली गई।
वहीं दूसरी ओर रात के ठीक 12 बजते ही शहर की प्रमुख ठाकुरबाड़ियों व मंदिरों में शंख, घंटे और घड़ियालों की मंगल ध्वनि गूंज उठी। कान्हा के जन्मोत्सव पर श्रद्धालुओं ने 'जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी' के नारों के साथ वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
संकट मोचन दरबार से निकली सांईंनाथ की पालकी यात्रा शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। यह शोभायात्रा घंटाघर चौक, कचहरी चौक, तिलकामांझी, नौलखा, मनाली चौक, नगर निगम रोड, आदमपुर चौक, मानिक सरकार चौक, बूढ़ानाथ चौक, नयाबाजार, कोतवाली चौक और खलीफाबाग चौक होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंचकर संपन्न हुई।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भक्ति के रंग में डूबा भागलपुर; संकट मोचन दरबार से गाजे-बाजे के साथ निकली सांईंनाथ की भव्य पालकी शोभायात्रा
घंटाघर से बूढ़ानाथ और खलीफाबाग तक भजनों पर थिरकते रहे श्रद्धालु, जगह-जगह महिलाओं ने उतारी पालकी की आरती
रात के 12 बजते ही ठाकुरबाड़ियों में गूंजे शंख-घंटे, जन्मोत्सव पर 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के लगे जयकारे
बरारी स्थित पुरानी ड्योढ़ी में निभाई गई वर्षों पुरानी कौड़ी लुटाने की परंपरा, 24 घंटे के अखंड अष्टयाम के बाद आज गंगा में होगा विसर्जन
पालकी को चार प्रमुख भक्त कांधे पर लेकर चल रहे थे, जबकि उसे स्पर्श करने और कांधा देने के लिए मार्गभर श्रद्धालुओं में होड़ मची रही। रास्ते में दर्जनों स्थानों पर महिलाओं व युवतियों ने पालकी को रोककर पुष्प वर्षा की और धूप-दीप से आरती उतारी। शोभायात्रा में बज रहे भजनों की मधुर धुन पर महिलाएं और युवतियां भक्तिभाव में झूमती-नाचती नजर आईं।
रथ पर मंदिर के व्यवस्थापक दिनेश चन्द्र झा सहित विद्वान पंडित सवार थे। शोभायात्रा में समिति के अध्यक्ष प्रदीप यादव, सचिव अरुण कुमार गुप्ता, आशा गुप्ता, विक्की सांईं और अनुज समेत सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।
आधी रात शंख-घंटे की गूंज, ठाकुरबाड़ियों में उत्सव
आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण के साथ ही मंदिरों में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। मारवाड़ी टोला लेन स्थित ऐतिहासिक राधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी, अलीगंज की राधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी, गुड़हट्टा चौक स्थित राधा-कृष्ण मंदिर, रंगनाथ मंदिर, सूजागंज बाजार स्थित रुक्मिणी श्रीकृष्ण मंदिर, बाटा गली स्थित राधा-कृष्ण मंदिर, बाबा बूढ़ानाथ मंदिर, कुपेश्वरनाथ मंदिर और वेरायटी चौक स्थित दुग्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर परिसर स्थित राधा-कृष्ण मंदिर सहित अन्य देवालयों में विशेष महाआरती व जन्मोत्सव का अनुष्ठान हुआ। श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर कान्हा का पंचामृत अभिषेक किया और माखन-मिश्री का भोग लगाया।
बरारी में कौड़ी लुटाने की अनूठी परंपरा, अखंड अष्टयाम शुरू
उधर, पुरानी ड्योढ़ी बरारी स्थित प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर में तीन दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव का शुभारंभ वैदिक अधिवास अनुष्ठान के साथ हुआ। यहां भगवान श्रीकृष्ण, राधिका माता, बलभद्र और गरुड़ भगवान की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।
मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल दत्त ठाकुर ने बताया कि अधिवास के उपरांत मंदिर की सदियों पुरानी 'कौड़ी लुटाने' की परंपरा पूरे उत्साह से निभाई गई। महिलाओं ने जमीन पर गिरती कौड़ियों को श्रद्धापूर्वक समेटा। लोक-मान्यता है कि लूटी गई कौड़ी को सिंदूर की डिबिया में रखने से घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है, इसलिए श्रद्धालु इसे भगवान का सिद्ध प्रसाद मानकर सहेजते हैं।
शुक्रवार सुबह 10:30 बजे से मंदिर परिसर में 24 घंटे का अखंड अष्टयाम संकीर्तन प्रारंभ हुआ, जिसमें बरारी और सबौर समेत आसपास के जाने-माने भजन कलाकारों की टोलियां शामिल हुईं। शनिवार को अष्टयाम की पूर्णाहुति के बाद प्रतिमाओं का बरारी सीढ़ी घाट पर गंगा नदी में विसर्जन किया जाएगा।
